आचार्य बालकृष्ण और डॉ. संध्या पुरेचा महामहोपाध्याय (डी. लिट्) की मानद उपाधि से विभूषित




- राज्यपाल पटेल की अध्यक्षता में महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय का पांचवा दीक्षांत समारोह हुआउज्जैन, 31 मार्च (हि.स.)। राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल की अध्यक्षता में सोमवार को उज्जैन के महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय का पांचवा दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। समारोह में योग, आयुर्वेद, संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में विगत 35 वर्षों से अनवरत सेवारत तथा अविस्मरणीय योगदान देने के लिए महर्षि पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपति आचार्य बालकृष्ण तथा नृत्य, नाट्यशास्त्र, संस्कृत एवं भारतीय जान परंपरा के क्षेत्र में अनवरत साधनारत केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा को महामहोपाध्याय (डी. लिट्) की मानद उपाधि से विभूषित किया गया।
समय और शिक्षा का सही उपयोग ही व्यक्ति को जीवन में सफल बनाता हैः राज्यपाल पटेल
समारोह में राज्यपाल पटेल ने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों से कहा कि समय और शिक्षा का सही उपयोग ही व्यक्ति को जीवन में सफल बनाता है। आप जीवन में कितने ही सफल हो जाएं, लेकिन कभी अपने माता-पिता को न भूलें, क्योंकि वे अत्यंत कठोर परिश्रम करके आपका पालन पोषण करते हैं तथा आपको उत्तम शिक्षा दिक्षा दिलवाते हैं।
उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा विश्व की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है। हमें यह संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचना है। हमारी भारतीय संस्कृति के खजाने में छिपे ज्ञान और विज्ञान को अपनी प्रतिभा से जन जन तक पहुंचाने का संकल्प आज समस्त उपाधि प्राप्तकर्ता लें। उन्होंने कहा कि आज उन्हें इस समारोह में शामिल होकर अत्यंत खुशी प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के द्वारा शिक्षा व्यवस्था का दायरा मनुष्य से मानवता तक और अतीत से आधुनिकता तक विस्तारित किया है।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि इस विश्वविद्यालय को ए प्लस ग्रेड मिला है, उसकी बहुत सारी शुभकामनाएं। आज दीक्षित होने वाले विद्यार्थी ये प्रयास करें कि कैसे वे अपने ज्ञान का उपयोग वंचित लोगों के उद्धार में कर सकें। शिक्षा जगत पर समाज और राष्ट्र की बहुत सारी आशाएं टिकी हैं। विद्यार्थियों के ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है कि वे आने वाले समय में भारत को पूर्णतः विकसित बनाने में अपना योगदान दें। वैदिक ज्ञान के उपयोग, महत्व और भावी संभावनाओं को किस प्रकार विस्तारित किया जाए, इसके लिए कार्य संपादन करें। कभी भी यह न सोचें कि आप अकेले हैं बल्कि यह सोचे हैं कि आप अकेले ही काफी हैं जो संसार में ज्ञान के बल पर परिवर्तन ला सकते हैं। आज की पीढ़ी को संस्कृत और परंपराओं के ज्ञान की आवश्यकता है, क्योंकि अच्छे संस्कारों के अंकुरण से ही संस्कृति का रक्षण संभव है। विश्व के प्राचीन ज्ञान का बोध संस्कृत के माध्यम से ही संभव हो सकता है। संस्कृत शास्त्रों में करुणा संवेदना और संस्कृति का समावेश है। उन्होंने सभी को शुभकामनाएं दी।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि आज जिन विद्यार्थियों को उपाधि प्राप्त हो रही है, वे सभी हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें तथा भारतीय संस्कृति और मान्यताओं को पूरे विश्व के पटल पर लेकर आने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने की संकल्पना को ध्यान में रखते हुए निरंतर परिश्रम करें। उन्होंने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में वार्तालाप में अधिक से अधिक संस्कृत भाषा का उपयोग किया जाए। हमारी भारतीय संस्कृति की सभी भाषाओं का सम्मान करें और उन पर गर्व करें। शीघ्र ही प्रदेश के विश्वविद्यालयों में भारत के अन्य राज्यों की भाषाओं का भी अध्यापन करने का कार्य किया जाएगा। उन्होंने सभी को शुभकामनाएं दी।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति को कुलगुरु नाम से संबोधित करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन में बहुत बड़ा और अमूल्य क्षण होता है। यह सभी विद्यार्थियों के कठोर परिश्रम का परिणाम है। विद्यार्थी कभी भी विद्या अर्जन के कार्य से मुक्त न हों, क्योंकि विद्या ही हमें मुक्ति का मार्ग दिखाती है। राष्ट्र निर्माण के लिए विद्या अर्जन करना,अध्ययन और अध्यापन करना अत्यंत जरूरी है। विद्या से ही हम विषम से विषम परिस्थितियों का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। आज दीक्षित हो रहे विद्यार्थी भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा के प्रति सदैव अपने आप को समर्पित करें। डॉ. संध्या पुरेचा ने कहा कि उन्हें आज अत्यंत हर्ष का अनुभव हो रहा है। संस्कृत भाषा और संस्कृति एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। संस्कृत मात्र एक भाषा नहीं बल्कि इसमें हमारी भारतीय संस्कृति का मूल तत्व निहित है। संस्कृत भाषा हमारी संस्कृति की आत्मा है ।यह एक सोच है, विचार है, भाव है । हमेशा इस पर गर्व करें।
अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय से प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन भी इस अवसर पर किया गया। समारोह में महर्षि पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपति आचार्य बालकृष्ण तथा केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा को महामहोपाध्याय (डी. लिट्) की मानद उपाधि से विभूषित किया गया। समारोह में सत्र 2022-23 में उत्तीर्ण हुए स्नातकों को (कुल 1349 स्नातक) तथा सन 2023-24 में उत्तीर्ण हुए स्नातकों को (कुल 1012 स्नातक) उपाधियां प्रदान की गई, जिसमें से वरीयता सूची अनुसार 79 स्नातकों को कुलाधिपति के करकमलों से स्वर्ण, रजत, तथा कांस्य पदक के साथ उपाधियाँ प्रदान की गई।----------
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर