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सुमित राय के खिलाफ अभिषेक के दो पूर्व सुरक्षाकर्मियों के बयानों को सीआईडी ने बनाया जांच का आधार

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सुमित राय के खिलाफ अभिषेक के दो पूर्व सुरक्षाकर्मियों के बयानों को सीआईडी ने बनाया जांच का आधार


कोलकाता, 13 सितंबर (हि.स.)। शालबनी जमीन भ्रष्टाचार मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित राय के खिलाफ जांच में सीआईडी ने उनके दो पूर्व सुरक्षाकर्मियों के बयानों को अहम आधार बनाया है। सीआईडी ने दो सितंबर को मामले में आरोप पत्र दाखिल किया था। इसमें पूर्व विधायक सुजय हाजरा समेत कई लोगों के नाम हैं, हालांकि सुमित राय को आरोपित के रूप में शामिल नहीं किया गया है।

सीआईडी के अनुसार, शालबनी में शरणार्थियों के लिए आवंटित सरकारी जमीन पर कथित रूप से कब्जा किया गया था। जांच एजेंसी का दावा है कि सुजय हाजरा, अनितेश पैरा और उनके सहयोगियों ने सुमित राय के निर्देश पर जमीन पर कब्जा किया। आरोप है कि जमीन की कथित जालसाजी से मिले पैसों का एक बड़ा हिस्सा सुजय हाजरा सुमित राय के कार्यालय भेजते थे। सुजय हाजरा को सीआईडी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

आरोप पत्र में सीआईडी ने 20 गवाहों का उल्लेख किया है। इनमें स्थानीय निवासी और व्यवसायियों के अलावा अभिषेक बनर्जी के दो पूर्व सुरक्षाकर्मी तथा दो वाहन चालक शामिल हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, दोनों पूर्व सुरक्षाकर्मियों ने अपने बयान में सुमित राय की कथित भूमिका के बारे में जानकारी दी है।

सीआईडी को सुमित राय और स्थानीय लोगों के बीच कथित आर्थिक लेनदेन के भी प्रमाण मिले हैं। सुजय हाजरा के लिए काम करने वाले बिचौलियों देवाशीष दे और सुब्रत हाजरा ने भी सुमित राय को पैसे भेजे जाने की बात स्वीकार की है। शेखपुर गांव के दो निवासियों ने भी सुजय हाजरा और सुमित राय के बीच कथित आर्थिक लेनदेन की जानकारी जांचकर्ताओं को दी है।

जमीन के दस्तावेजों में दर्ज कई विक्रेताओं के नाम और पते पर भी सीआईडी ने सवाल उठाए हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि कुछ नाम और पते फर्जी हो सकते हैं। कई कथित विक्रेताओं को उनके बताए पते पर नहीं पाया गया और स्थानीय लोग भी उन्हें पहचान नहीं सके। आरोप है कि 2021 के बाद लंबे समय से जमीन पर खेती कर रहे स्थानीय लोगों को वहां से हटा दिया गया।

सीआईडी के आरोप पत्र के अनुसार, 2018 से 2021 के बीच सुमित राय के एक सरकारी बैंक खाते में कुल सात करोड़ रुपये जमा हुए। पूछताछ में वह इन पैसों के स्रोत की जानकारी नहीं दे सके, ऐसा जांच एजेंसी का दावा है।

सुमित राय को पहले सुप्रीम कोर्ट से जांच के मामले में संरक्षण मिला था। राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने संरक्षण समाप्त कर दिया। इसके बाद सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास से सुमित राय को गिरफ्तार किया। फिलहाल वह सीआईडी की हिरासत में हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता