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संशोधित : मतदाता सूची ‘फ्रीज’ करने पर ममता बनर्जी का सवाल, ट्रिब्यूनल प्रक्रिया से पहले निर्णय क्यों

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संशोधित : मतदाता सूची ‘फ्रीज’ करने पर ममता बनर्जी का सवाल, ट्रिब्यूनल प्रक्रिया से पहले निर्णय क्यों


(हेडिंग में संशोधन के साथ पुनः जारी)

हुगली, 08 अप्रैल (हि.स.)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मतदाता सूची को ‘फ्रीज’ किए जाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कई मतदाताओं के मामले ट्रिब्यूनल में लंबित हैं, तो आखिर किस आधार पर सूची को अंतिम रूप दिया गया।

बुधवार को श्रीरामपुर में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य में करीब 60 लाख ‘विचाराधीन’ मतदाताओं में से लगभग 26 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि इन लोगों में से जो ट्रिब्यूनल में अपील कर मतदान से पहले मान्यता प्राप्त कर लेंगे, क्या उन्हें इस बार वोट देने का अधिकार मिलेगा या नहीं—इस पर अब तक कोई स्पष्टता नहीं है।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मुद्दे को ‘महत्वपूर्ण’ माना है, लेकिन अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है। इसी बीच, पहले चरण के 152 सीटों के लिए नामांकन की अंतिम तिथि के साथ ही मतदाता सूची को ‘फ्रीज’ कर दिया गया, जो चिंताजनक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के गठन का निर्देश दिया और जिनके नाम हटाए गए हैं उन्हें अपील का अधिकार दिया, तो ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही मतदाता सूची को फ्रीज कैसे कर दिया गया? यह मेरी समझ से परे है।

इस दौरान राज्य सरकार के वकील कल्याण ने बताया कि अभी तक चुनाव आयोग ने ट्रिब्यूनल के लिए आवश्यक ढांचा पूरी तरह तैयार नहीं किया है, जिस कारण वह ठीक से काम शुरू नहीं कर पाया है।

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर आखिरी दम तक लड़ाई लड़ेंगी। उन्होंने कहा कि कभी-कभी उन्हें लगता है कि वह मुख्यमंत्री पद छोड़कर फिर से वकालत शुरू करें, लेकिन जिम्मेदारियों के कारण ऐसा संभव नहीं है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय बलों के जरिए गांवों में मतदाताओं को रोकने की योजना बनाई जा रही है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।

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हिन्दुस्थान समाचार