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संदकफू में एक महीने के भीतर दूसरे पर्यटक की मौत, स्वास्थ्य जांच अनिवार्य करने की मांग तेज

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दार्जिलिंग, 24 अक्टूबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के सबसे ऊंचे पर्यटन स्थल संदकफू में पर्यटकों की मौत की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। उत्तर 24 परगना के बारासात निवासी बुबाई पाल (48) की मौत के बाद पर्यटन संगठनों ने संदकफू जाने वाले पर्यटकों की स्वास्थ्य जांच अनिवार्य करने की मांग उठाई है। एक महीने के भीतर यहां दो पर्यटकों की मौत हो चुकी है।

जानकारी के अनुसार, बुबाई पाल 18 अक्टूबर को परिवार के पांच सदस्यों के साथ न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन से सीधे मानेभंजन पहुंचे थे। अगले दिन संदकफू में रात बिताने के बाद 20 अक्टूबर को वे टुमलिंग पहुंचे। उसी रात अचानक उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी और उनकी तबीयत बिगड़ गई। पहले उन्हें मानेभंजन और फिर सुखियापोखरी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

दार्जिलिंग के जिलाधिकारी हरिशंकर पनिकर ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। प्रशासन की ओर से शव को बारासात ले जाने की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

इससे पहले 30 सितंबर को कूचबिहार के तूफानगंज निवासी प्रियतोष अधिकारी (28) की भी संदकफू यात्रा के दौरान सांस लेने में परेशानी के कारण मौत हो गई थी। बताया गया कि उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो गया था।

हिमालयन हॉस्पिटैलिटी एंड टूरिज्म डेवलपमेंट नेटवर्क के एक पदाधिकारी का मानना है कि ट्रेकिंग के बजाय वाहनों से तेजी से ऊंचाई पर पहुंचना भी पर्यटकों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। हालांकि, इससे पहले जान गंवाने वाले युवक के ट्रेकिंग करके संदकफू पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

पर्यटन संगठनों का कहना है कि अमरनाथ यात्रा की तरह संदकफू जाने वाले पर्यटकों के लिए भी स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की जानी चाहिए। उनका आरोप है कि पर्यटकों की सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को लेकर प्रशासन के समक्ष कई बार प्रस्ताव रखे गए, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। वहीं, बुबाई पाल के परिचितों ने भी समय पर एंबुलेंस उपलब्ध होने पर उनकी जान बचने की संभावना जताई है।

हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार