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वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर पैरा-शिक्षकों और आशा कर्मियों का प्रदर्शन, पुलिस से झड़प

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वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर पैरा-शिक्षकों और आशा कर्मियों का प्रदर्शन, पुलिस से झड़प


कोलकाता, 27 फ़रवरी (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर शुक्रवार को पैरा-शिक्षकों और आशा कर्मियों ने अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन किया। राजधानी कोलकाता में शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालयों के बाहर हुए इन प्रदर्शनों के दौरान तनाव की स्थिति भी देखने को मिली।

करीब 200 पैरा-शिक्षकों ने संयुक्त मंच संग्रामी एकता मंच के बैनर तले विकास भवन के बाहर धरना दिया। इस दौरान पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई और प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठकर राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु से मिलने की मांग करने लगे।

प्रदर्शनकारी पैरा-शिक्षकों की ओर से प्रीथा लाहिरी ने कहा कि उन्हें वर्तमान में नौ हजार से दस हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है, जो बेहद कम है। उन्होंने वेतन बढ़ाकर 15 हजार से 20 हजार रुपये करने की मांग की। साथ ही कहा कि राज्य सरकार के वोट-ऑन-अकाउंट बजट में घोषित एक हजार रुपये की बढ़ोतरी नाकाफी है।

मंच ने भविष्य निधि (पीएफ), ग्रेच्युटी की सुविधा और चुनाव ड्यूटी से राहत देने की भी मांग की, जैसी सुविधाएं राज्य सरकार के अन्य कर्मचारियों को मिलती हैं। यह इस सप्ताह पैरा-शिक्षकों का दूसरा और पिछले सप्ताह से तीसरा प्रदर्शन था। राज्य में करीब 50 हजार से अधिक पैरा-शिक्षक लगभग 67 हजार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत हैं।

इसी बीच, करीब 500 आशा कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य भवन के बाहर प्रदर्शन किया। निषेधाज्ञा का हवाला देकर पुलिस द्वारा हटाने की कोशिश किए जाने पर आशा कर्मियों की पुलिस से झड़प हो गई।

आशा कर्मियों का कहना है कि वे राज्य की स्वास्थ्य योजनाओं और टीकाकरण अभियानों में अहम भूमिका निभाती हैं और रोज 12 घंटे से अधिक काम करती हैं, फिर भी उन्हें चार हजार 500 रुपये से कम मानदेय मिलता है और पिछले तीन महीनों से भुगतान नहीं हुआ है। उन्होंने मानदेय बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव एन. एस. निगम से मिलने की अनुमति नहीं मिली।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय