लख्खी भंडार योजना में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा, युवक के सात खातों में जा रही थी अनुदान राशि
हुगली, 30 मई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल सरकार की महिलाओं के लिए संचालित लख्खी भंडार योजना में कथित धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मुर्शिदाबाद जिले के रघुनाथगंज क्षेत्र में एक युवक के सात अलग-अलग खातों में इस योजना की मासिक अनुदान राशि पहुंचने का आरोप लगा है। मामले में शुक्रवार रात पुलिस ने आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया है।
शनिवार को पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपित की पहचान तारिकुल रहमान के रूप में हुई है। वह मुर्शिदाबाद जिले के रघुनाथगंज-2 ब्लॉक के जोतकामल ग्राम पंचायत अंतर्गत उस्मानपुर गांव का निवासी है। आरोप है कि उसने महिलाओं के नाम पर आवेदन पत्र भरकर उनमें अपना बैंक खाता नंबर दर्ज कराया और इस तरह लख्खी भंडार योजना की राशि प्राप्त करता रहा।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इससे पहले इसी मामले में गिरफ्तार किए गए मोस्ताफिजुर रहमान से पूछताछ के दौरान तारिकुल रहमान का नाम सामने आया था। जांच में पता चला कि उसके सात बैंक खातों में योजना की अनुदान राशि भेजी जा रही थी। इसके बाद शुक्रवार रात पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। हालांकि गिरफ्तारी के बाद आरोपित ने मीडिया के सामने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में मुर्शिदाबाद, पश्चिम मेदिनीपुर और रिशड़ा समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि महिलाओं के लिए शुरू की गई इस योजना का लाभ पुरुष भी उठा रहे थे। इन मामलों के सामने आने के बाद पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
इस घटना के बाद यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं मुर्शिदाबाद जिले में कोई संगठित फर्जीवाड़ा गिरोह तो सक्रिय नहीं था, जो सरकारी योजनाओं का लाभ गलत तरीके से हासिल कर रहा था। साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि लाभार्थियों के दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच की जिम्मेदारी जिन स्थानीय और जिला प्रशासनिक अधिकारियों पर थी, क्या उनकी लापरवाही या मिलीभगत के कारण यह गड़बड़ी संभव हो सकी?
पुलिस अब इस मामले की गहन जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस कथित फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा क्या इसके तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। जांच एजेंसियां संबंधित बैंक खातों और दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही हैं।
लख्खी भंडार योजना में कथित अनियमितताओं के लगातार सामने आ रहे मामलों ने प्रशासन की निगरानी व्यवस्था और लाभार्थी सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय

