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मरीजों की सुरक्षा को लेकर एनबीएमसीएच में बड़ा कदम, बनेगी फार्माकोविजिलेंस कमेटी

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मरीजों की सुरक्षा को लेकर एनबीएमसीएच में बड़ा कदम, बनेगी फार्माकोविजिलेंस कमेटी


सिलीगुड़ी, 12 अगस्त (हि. स.)। उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल (एनबीएमसीएच) में मरीजों की सुरक्षा और उपचार की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही फार्माकोविजिलेंस कमेटी का गठन किया जाएगा। अस्पताल में मरीजों को दी जाने वाली दवाओं और इंजेक्शन की मात्रा, संभावित ओवरडोज तथा दवाओं से होने वाले साइड इफेक्ट पर यह कमेटी नजर रखेगी। अस्पताल में इलाज के दौरान जरूरत से ज्यादा दवा या इंजेक्शन देने, महंगी जांच कराने तथा आवश्यकता से अधिक महंगी दवाएं लिखे जाने जैसी शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों की निगरानी और मरीजों को अनावश्यक जोखिम से बचाने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है।

अस्पताल के अधीक्षक डॉ. कौशिक ईश्वर ने बताया कि सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार जल्द ही कमेटी का गठन किया जाएगा। एनबीएमसीएच के ओपीडी में प्रतिदिन औसतन करीब चार हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जबकि लगभग एक हजार 200 मरीज इंडोर में भर्ती रहकर उपचार लेते हैं। अब इन मरीजों को दी जाने वाली दवाओं और इंजेक्शनों की मात्रा तथा उनके संभावित दुष्प्रभावों की नियमित निगरानी की जाएगी।

प्रस्तावित कमेटी में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और अस्पताल अधीक्षक के अलावा मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स, फार्माकोलॉजी समेत विभिन्न विभागों के प्रमुखों को शामिल किया जाएगा। कमेटी के सदस्य इंडोर मरीजों की प्रिस्क्रिप्शन की समीक्षा करेंगे। वहीं, आउटडोर विभाग में सरप्राइज विजिट के दौरान जुटाई गई जानकारी का भी विश्लेषण किया जाएगा।

मेडिकल कॉलेज सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में मरीजों के इलाज के लिए हाई-डोज इंजेक्शन और एंटीबायोटिक का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में दवाओं की सही मात्रा सुनिश्चित करना और उनके कारण होने वाले संभावित साइड इफेक्ट की समय रहते पहचान करना बेहद जरूरी है। किसी दवा या इंजेक्शन के इस्तेमाल के बाद मरीज में विषाक्तता या प्रतिकूल प्रतिक्रिया सामने आने पर कमेटी तत्काल इसकी समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाएगी।

इसके अलावा, कमेटी जूनियर डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मचारियों को दवाओं तथा इंजेक्शनों के सही इस्तेमाल, निर्धारित मात्रा और आवश्यक सावधानियों को लेकर नियमित प्रशिक्षण एवं परामर्श भी देगी।

मेडिकल कॉलेज प्रशासन का मानना है कि इससे दवाओं के गलत या अत्यधिक इस्तेमाल और ओवरडोज के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी। एनबीएमसीएच में बड़ी संख्या में इंटर्न और हाउस स्टाफ के माध्यम से मरीजों को चिकित्सा सेवाएं दी जाती हैं। ऐसे में दवाओं के सही इस्तेमाल को लेकर निगरानी और प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करना मरीजों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार