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भूस्खलन और तेज बारिश से बार-बार ठप हो रही सिलीगुड़ी–सिक्किम का आवागमन सह संपर्क

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भूस्खलन और तेज बारिश से बार-बार ठप हो रही सिलीगुड़ी–सिक्किम का आवागमन सह संपर्क


सिलीगुड़ी, 14 जुलाई (हि. स.)। उत्तर बंगाल और सिक्किम को जोड़ने वाली जीवनरेखा राष्ट्रीय राजमार्ग-10 इन दिनों लगातार भूस्खलन और बारिश के कारण गंभीर संकट में है। मानसून की शुरुआत होते ही यह अहम सड़क बार-बार बाधित हो रही है, जिससे यात्रियों और पर्यटकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

कहीं पहाड़ से धसकर मिट्टी और बोल्डर सड़क को बंद कर देते है, तो कहीं तीस्ता नदी का पानी सड़क पर चढ़ जा रहा है। नतीजतन, सैकड़ों वाहन घंटों तक रास्ते में फंसे रहते हैं।

हाल ही में 20 माइल इलाके में भारी भूस्खलन के कारण लंबा जाम लग गया, वहीं तिस्ता बाजार समेत कई जगहों पर नदी का पानी सड़क तक पहुंच गया। इसके चलते सिलीगुड़ी, कालिम्पोंग और गंगटोक के बीच संपर्क व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है।

सड़क की खराब स्थिति को देखते हुए रखरखाव की जिम्मेदारी राज्य के पीडब्ल्यूडी से हटाकर केंद्र की एजेंसी नेशनल हाईवे एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) को दी गई थी। लेकिन हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। उल्टा धस वाले इलाकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

सेवक कालीबाड़ी, माजितार, चित्रे और मेल्ली जैसे इलाकों में नए-नए भूस्खलन के मामले सामने आ रहे है, जिससे यह मार्ग और अधिक खतरनाक बनता जा रहा है।

लगातार बाधित हो रहे इस मार्ग का सीधा असर पर्यटन उद्योग पर पड़ रहा है। पर्यटक बुकिंग रद्द कर रहे हैं, जिससे कालिम्पोंग और सिक्किम के पर्यटन व्यवसाय को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ईस्टर्न हिमालय ट्रैवल्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन के परिवहन समिति सदस्य देवाशीष मैत्र का कहना है कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग को लेकर किसी भी स्तर पर ठोस पहल नहीं हो रही है। जिसका खामियाजा आम लोगों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

सड़क की वास्तविक क्षमता का सही आकलन नहीं किया जा रहा है और कमजोर पहाड़ी इलाकों में भारी वाहनों के आवागमन पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं है। इससे मिट्टी और अधिक ढीली होकर भूस्खलन की आशंका बढ़ रही है। यदि जल्द ही वैज्ञानिक तरीके से इस सड़क का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो भविष्य में राष्ट्रीय राजमार्ग-10 का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।

उन्होंने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से इस महत्वपूर्ण मार्ग को बचाने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है।

हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार