बाल विवाह रोकने के लिए राज्यभर में जागरूकता
कोलकाता, 08 मार्च (हि. स.)। बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पश्चिम बंगाल में चलाया गया ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ अभियान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर रविवार को संपन्न हो गया। इस अभियान के तहत रथ ने राज्य भर में 27 हजार 55 किलोमीटर की यात्रा करते हुए दो हजार 567 गांवों का दौरा किया और 10 लाख 57 लाख 150 से अधिक लोगों तक बाल विवाह मुक्त समाज का संदेश पहुंचाया।
यह अभियान ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ द्वारा भारत सरकार के ‘बाल विवाह समाप्त करने के 100 दिन के गहन अभियान’ के तहत चलाया गया था। देश भर में इस अभियान के अंतर्गत 500 से अधिक ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ विभिन्न राज्यों में भेजे गए, जिन्होंने समुदायों को बाल विवाह विरोधी कानूनों और इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन बाल संरक्षण और बाल अधिकारों के क्षेत्र में काम करने वाले देश के सबसे बड़े नेटवर्क में से एक है, जिसके 250 से अधिक सहयोगी संगठन हैं, जिनमें से 14 पश्चिम बंगाल में कार्यरत हैं।
राज्य में इस अभियान को विभिन्न वर्गों से व्यापक समर्थन मिला। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, महिला सर्वाइवर, सामाजिक संगठन, पुलिसकर्मी और धार्मिक नेता एकजुट होकर बाल विवाह को समाप्त करने के संकल्प के साथ आगे आए। कोलकाता में पिछले महीने पश्चिम बंगाल की महिला एवं बाल विकास तथा सामाजिक कल्याण मंत्री डॉ. शशि पांजा ने इस रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
एक महीने तक चले इस अभियान के दौरान रथ ने स्कूलों, ग्राम सभाओं, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक स्थानों का दौरा किया। इस दौरान 827 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें रैलियां, नुक्कड़ नाटक, शपथ समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बाल विवाह से प्रभावित लोगों की कहानियों का प्रस्तुति शामिल था।
अभियान के दौरान 898 स्कूल और कॉलेज तथा एक हजार 598 धार्मिक स्थलों तक पहुंच बनाई गई, जिसमें एक लाख 66 हजार 776 छात्र-छात्राओं और शिक्षकों तथा तीन हजार 457 धार्मिक नेताओं ने भाग लिया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2019-21 के दौरान पश्चिम बंगाल में बाल विवाह की दर 41.6 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 23.3 प्रतिशत से काफी अधिक है। देश भर में इस अभियान के तहत दो मुख्यमंत्रियों, 49 राज्य मंत्रियों, 82 सांसदों, 154 विधायकों और 99 जिलाधिकारियों सहित कई जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने विभिन्न राज्यों में ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को रवाना किया।
देश स्तर पर इस अभियान के दौरान रथों ने 66 हजार 344 गांवों का दौरा करते हुए छः लाख 79 हजार 77 किलोमीटर की यात्रा की और 28 राज्यों में पांच करोड़ दो लाख 68 हजार 33 लोगों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाया।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की वरिष्ठ नीति सलाहकार ज्योति माथुर ने कहा कि यह रथ केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि न्याय का वाहक है, जो कानून, सुरक्षा और जवाबदेही का संदेश लेकर समुदायों तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि इस अभियान में राजनीतिक नेतृत्व से लेकर प्रशासन, शिक्षाविदों और महिला सर्वाइवर तक सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय की हालिया रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि अब वैश्विक स्तर पर भी यह स्वीकार किया जा रहा है कि बाल विवाह वास्तव में बाल शोषण के समान है और इसे गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
संस्था के अनुसार पिछले एक वर्ष में पश्चिम बंगाल में उसके सहयोगी संगठनों, स्थानीय प्रशासन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सामुदायिक नेताओं के समन्वित प्रयासों से 11 हजार 938 बाल विवाह रोके गए हैं।
जागरूकता अभियान के दौरान रथों पर लगाए गए पोस्टर, लाउडस्पीकर और शपथ हस्ताक्षर बोर्ड के माध्यम से दूर-दराज और वंचित समुदायों तक भी संदेश पहुंचाया गया। बेहतर सड़कों वाले क्षेत्रों में चार पहिया वाहनों के जरिए अभियान चलाया गया, जबकि दुर्गम गांवों में मोटरसाइकिल और साइकिल रैलियों के माध्यम से लोगों तक पहुंच बनाई गई।
अभियान के दौरान पंचायतों, जिला प्रशासन और अन्य सरकारी अधिकारियों को भी बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता और संकल्प अभियान से जोड़ा गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय

