home page

पुलिस हिरासत में युवक की मौत, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप

 | 

कोलकाता, 14 सितंबर (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में पुलिस हिरासत में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत का एक और मामला सामने आया है। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोणा थाने में चोरी के मामले में गिरफ्तार 20 वर्षीय युवक राहुल रुइदास की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, राहुल ने रविवार को थाने के शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया था। अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं, परिजनों ने पुलिस पर थाने के भीतर उसकी हत्या करने का आरोप लगाया है।

सोमवार को पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चंद्रकोणा थाना क्षेत्र के बोगेश्वरपुर निवासी राहुल को चोरी के एक मामले में करीब चार दिन पहले गिरफ्तार किया गया था। घटाल अनुमंडल अदालत ने उसे चार दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा था। रविवार को उसने थाने के शौचालय में फांसी लगाने का प्रयास किया। शौचालय से आवाज सुनकर पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और उसे बाहर निकाला।

गंभीर हालत में राहुल को पहले स्थानीय ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया। हालत बिगड़ने पर उसे घाटाल अनुमंडल अस्पताल भेजा गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, राहुल नशे का आदी था। परिवार ने भी उसके नशे की लत होने की बात स्वीकार की है, लेकिन आरोप लगाया कि थाने के भीतर उसकी हत्या की गई। पुलिस प्रशासन की ओर से अभी इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।

यह घटना उत्तर 24 परगना जिले के हालीशहर थाने की हिरासत में तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता बीरजू केओट की मौत के करीब एक महीने बाद हुई है। बीरजू केओट कांचरापाड़ा नगरपालिका की पूर्व तृणमूल कांग्रेस पार्षद जेनी शर्मा केओट के पति थे। अगस्त के दूसरे सप्ताह में उनकी पुलिस हिरासत में मौत हुई थी।

पुलिस ने बीरजू को कथित वसूली और अन्य अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किया था। अदालत ने उन्हें पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा था। उनकी पत्नी ने आरोप लगाया था कि उनके थाने से चले जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने हिरासत में बीरजू की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उनकी मौत हो गई।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, बाद में बीरजू को हिरासत में बीमार हालत में पाया गया और आपात स्थिति में कल्याणी स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस मामले में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 10 अगस्त को हालीशहर में बीरजू के परिवार से मुलाकात की थी। उन्होंने पुलिस हिरासत में मौत की बात स्वीकार करते हुए मजिस्ट्रेट जांच की घोषणा की थी। साथ ही परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी।

इससे एक दिन पहले, नौ अगस्त को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जब कांचरापाड़ा में बीरजू के परिवार से मिलने जा रही थीं, तब स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था। उनके साथ तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी और डोला सेन भी थीं। बिजपुर रोड के पास उनके काफिले को रोककर नारेबाजी की गई थी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता