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पांडुआ की कालीपूजा में दिखेगी थीम और रोशनी की भव्यता, सोमनाथ मंदिर से लेकर पक्षियों के आशियाने तक होंगे आकर्षण

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पांडुआ की कालीपूजा में दिखेगी थीम और रोशनी की भव्यता, सोमनाथ मंदिर से लेकर पक्षियों के आशियाने तक होंगे आकर्षण


हुगली, 03 नवंबर (हि. स.)। हुगली जिले की ‘काली नगरी’ पांडुआ कालीपूजा के लिए सजने लगी है। पारंपरिक पूजा के साथ इस बार भी थीम आधारित पंडालों और आकर्षक रोशनी के जरिए दर्शकों को लुभाने की तैयारी जोरों पर है। थीम के बीच प्रतिस्पर्धा को देखते हुए कई पूजा आयोजक अपने पंडालों की सजावट से जुड़ी जानकारियां गोपनीय रख रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों से पांडुआ में थीम आधारित पूजा का आकर्षण लगातार बढ़ा है और इस बार भी आयोजकों ने कुछ खास तैयारियां की हैं।

पांडुआ के प्रमुख बड़े बजट वाले पूजा आयोजनों में शामिल प्रगति संघ इस बार गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर की प्रतिकृति तैयार कर रहा है। करीब 60 फीट ऊंचा और 100 फीट चौड़ा भव्य पंडाल बनाया जा रहा है। फाइबर समेत विभिन्न सामग्रियों से मंदिर का स्वरूप तैयार किया जा रहा है। यहां लगभग 28 फीट ऊंची आधुनिक शैली की मां काली की प्रतिमा स्थापित होगी। रोशनी की सजावट की जिम्मेदारी शांतिपुर के कलाकारों को दी गई है। आयोजकों ने एक विशेष आकर्षण की भी तैयारी की है, लेकिन फिलहाल उसका खुलासा नहीं किया है। पूजा आयोजक हिमाद्री राय और सुरजीत साह ने मंगलवार को बताया कि पंडाल, प्रतिमा और रोशनी के साथ एक खास चौंकाने वाला आकर्षण भी दर्शकों के लिए होगा।

वहीं, चंदन स्मृति संघ की इस बार की थीम ‘पक्षियों का आशियाना’ है। पंडाल में विलुप्त होते पक्षियों और उनके घोंसलों को दर्शाया जाएगा। अलग-अलग तरह के घोंसलों के मॉडल के साथ विभिन्न पक्षियों की प्रतिकृतियां भी लगाई जाएंगी। यहां मां काली की प्रतिमा को ‘पक्षियों की देवी’ के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। मिट्टी से बनी प्रतिमा को थीम के अनुरूप सजाया जाएगा। पंडाल की सजावट के साथ विशेष रोशनी की भी व्यवस्था की गई है। पूजा आयोजक अनुद्युति चक्रवर्ती ने कहा कि पांडुआ की लोकप्रिय पूजा की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए सभी तैयारियां की जा रही हैं।

इसी क्रम में पांडुआ मध्यपाड़ा व्यवसायी समिति के तरुण संघ की 66वीं वर्ष की पूजा की थीम ‘आह्वान’ रखी गई है। आयोजक इस बार धागों की बुनावट से तैयार पंडाल के जरिए दर्शकों को आकर्षित करना चाहते हैं। पंडाल में हाथियों के अनेक मॉडल लगाए जाएंगे। पौराणिक जीव हाथी को केंद्र में रखकर एक प्रतीकात्मक प्रस्तुति तैयार की जा रही है। यहां मां काली की प्रतिमा अपने पारंपरिक उग्र स्वरूप के बजाय शांत और सौम्य रूप में दिखाई देंगी। धागों की बुनावट के बीच रोशनी की विशेष सजावट पंडाल को अलग वातावरण देगी। पूजा आयोजक विकास शर्मा के अनुसार, पंडाल और रोशनी की सजावट पूजा की रात को और आकर्षक बनाएगी।

कुल मिलाकर, इस बार पांडुआ की कालीपूजा में मंदिर स्थापत्य, पक्षियों के संरक्षण और पौराणिक प्रतीकों पर आधारित अलग-अलग थीम दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनने जा रही हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय