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त्योहारों में अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी पर स्वास्थ्य मंत्री नाराज, बुलाई बैठक

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कोलकाता, 23 अक्टूबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने त्योहारों के दौरान सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की कम उपस्थिति पर नाराजगी जताई है। इस मामले को लेकर उन्होंने शुक्रवार को स्वास्थ्य भवन में आपात बैठक बुलाई। बैठक में सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य, अधीक्षक, उप-प्राचार्य, सहायक अधीक्षक और सफाईकर्मियों को उपस्थित रहने के लिए कहा गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने सवाल उठाया कि कर्मचारियों से काम कराने के लिए भी क्या निर्देश जारी करने पड़ेंगे?

मंत्री ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों की जिम्मेदारी जनता के प्रति है और सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं जनता के कर से चलती हैं। इसलिए सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग एक आपातकालीन सेवा है, जहां चौबीसों घंटे सातों दिन काम होता है। यहां त्योहारों के नाम पर सेवा में लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

दरअसल, दुर्गापूजा के दौरान कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा पंडाल में हुई दुर्घटना के बाद अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया था। एहतियात के तौर पर शहर के बड़े पूजा पंडालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम तैनात रखने की व्यवस्था की गई थी। इसी दौरान स्वास्थ्य मंत्री के संज्ञान में आया कि कुछ अस्पतालों में चिकित्सक और अन्य अधिकारी अनुपस्थित थे। कुछ कर्मचारियों के बिना अनुमति छुट्टी लेने की जानकारी भी सामने आई। इसके बाद उन्होंने शुक्रवार को बैठक बुलाई।

चोरबागान की घटना के बाद कोलकाता मेडिकल कॉलेज के कुछ जूनियर चिकित्सकों ने घायलों को निजी अस्पतालों में भेजे जाने पर सवाल उठाए थे। इस मामले में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने संबंधित चिकित्सकों की ड्यूटी और उनके बयानों को लेकर रिपोर्ट मांगी थी। नवमी के दिन स्वास्थ्य भवन के नियंत्रण कक्ष से मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सचिव और स्वास्थ्य मंत्री को इस संबंध में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।

इस मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अस्पतालों में चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और सफाईकर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना संबंधित अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी है। किस दिन कौन चिकित्सक ड्यूटी पर था और कौन अनुपस्थित था, इसकी निगरानी स्वास्थ्य मंत्री का काम नहीं है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य, उप-प्राचार्य और संबंधित अधिकारियों को इस मामले को देखना चाहिए। जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति से भी चर्चा की जा सकती है। कार्रवाई करनी है या नहीं, इसका निर्णय संबंधित अधिकारियों को लेना होगा।

हाल ही में पुरुलिया के देवेन महतो मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गंदगी को लेकर सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने अस्पताल परिसर से ही स्वास्थ्य मंत्री को फोन कर स्थिति की जानकारी दी थी। इस मामले में अस्पताल के प्राचार्य, उप-प्राचार्य और पांच सहायक अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अस्पतालों में साफ-सफाई बनाए रखने के उद्देश्य से ही यह बैठक बुलाई गई है। किसी एक अस्पताल में हुई लापरवाही दोबारा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सफाईकर्मियों या जरूरी उपकरणों की कमी नहीं है, लेकिन इसके बावजूद बिना अनुमति छुट्टी लेने की घटनाएं सामने आ रही हैं। कर्मचारियों को विभाग के प्रति जवाबदेह होने के साथ खुद के प्रति भी जिम्मेदार होना चाहिए। जरूरत पड़ी तो इस संबंध में निर्देश जारी किए जाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता