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चुनाव 26 : दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कर्सियांग में पंच कोणीय मुकाबला, पहाड़ी सीटों पर दिलचस्प चुनावी जंग

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चुनाव 26 : दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कर्सियांग में पंच कोणीय मुकाबला, पहाड़ी सीटों पर दिलचस्प चुनावी जंग


कोलकाता, 31 मार्च (हि. स.)। पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर अगले महीने दो चरणों में होने वाले चुनाव में जहां अधिकांश सीटों पर चार कोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा, वहीं दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और कर्सियांग की तीन पहाड़ी सीटों पर इस बार पांच दलों के बीच सीधी टक्कर होने जा रही है।

राज्य की ज्यादातर सीटों पर तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा-आईएसएफ गठबंधन तथा कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला है। लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों की इन तीन सीटों पर चुनावी समीकरण अलग हैं।

इन सीटों पर भाजपा (गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के समर्थन के साथ), भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा, इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट, वाम मोर्चा-आईएसएफ गठबंधन और कांग्रेस के बीच मुकाबला होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट के अलग से चुनाव लड़ने से दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कर्सियांग में चुनावी गणित जटिल हो गया है, क्योंकि इन क्षेत्रों में गोरखा मतदाता परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हालांकि सभी पार्टी अपने-अपने तरीके से इस स्थिति को अपने पक्ष में बता रहे हैं। भाजपा और उसके सहयोगी गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का कहना है कि इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट के मैदान में आने से भाजपा विरोधी मतों का बंटवारा होगा।

वहीं भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट की मौजूदगी से भाजपा-गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के पारंपरिक मतों में सेंध लगेगी, जिससे उनके उम्मीदवारों की जीत की संभावना बढ़ेगी।

इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट के प्रमुख अजय एडवर्ड्स ने इन दावों को खारिज करते हुए हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों के लोग, खासकर गोरखा समुदाय, लंबे समय से स्थायी राजनीतिक समाधान और अलग गोरखालैंड राज्य की मांग पूरी नहीं होने से निराश हैं।

उन्होंने कहा कि हम किसी का वोट काटने के लिए नहीं बल्कि तीनों सीटें जीतने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। हमारा मुख्य मुद्दा अलग गोरखालैंड राज्य है। हमने पहले सभी पहाड़ी दलों को साथ लाने की कोशिश की, लेकिन सहमति नहीं बनी, इसलिए अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया।

वहीं गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के महासचिव रोशन गिरी ने कहा कि उनकी पार्टी ने स्थायी राजनीतिक समाधान और गोरखालैंड की मांग को आगे बढ़ाने के लिए भाजपा का समर्थन करने का फैसला किया है। उनका कहना था कि छोटे राज्यों के गठन के मुद्दे पर भाजपा का रुख सकारात्मक रहा है।

भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के संस्थापक अनित थापा ने कहा कि उनकी पार्टी का मुख्य ध्यान पहाड़ी क्षेत्रों के विकास पर है और इसके लिए राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का समर्थन जरूरी है।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर