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कोलकाता में बर्खास्त 'योग्य' शिक्षकों का प्रदर्शन, नौकरी बहाली की मांग को लेकर धर्मतला में सड़क जाम

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कोलकाता, 07 अगस्त (हि. स.)। वर्ष 2016 की एसएससी (स्कूल सेवा आयोग) भर्ती प्रक्रिया में नियुक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूरा पैनल रद्द किए जाने के बाद नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। शुक्रवार को स्वयं को योग्य बताने वाले शिक्षक और शिक्षाकर्मी नौकरी बहाली की मांग को लेकर कोलकाता के धर्मतला स्थित डोरिना क्रॉसिंग पर धरना-प्रदर्शन और सड़क जाम पर बैठ गए।

प्रदर्शनकारियों ने सियालदह से मार्च निकालकर धर्मतला तक पहुंचने के बाद सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। आंदोलन का नेतृत्व शिक्षक नेता सुमन विश्वास, चिन्मय मंडल सहित अन्य प्रतिनिधि कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि राज्य सरकार ओएमआर शीट और अन्य दस्तावेजों की जांच कर योग्य एवं अयोग्य उम्मीदवारों को अलग करे तथा वास्तविक योग्य शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों को तत्काल सेवा में बहाल करे।

आंदोलनकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के कारण पूरे पैनल को रद्द किया, लेकिन योग्य उम्मीदवार भी इसकी चपेट में आ गए। उनका आरोप है कि बिना किसी व्यक्तिगत जांच के सभी की नौकरियां समाप्त कर दी गईं।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। धरने के कारण डोरिना क्रॉसिंग पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और कार्यालय समय में आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

गौरतलब है कि अप्रैल 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2016 एसएससी भर्ती के तहत 25 हजार 753 शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की नियुक्तियां रद्द कर दी थीं। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि अवैध रूप से प्राप्त वेतन को ब्याज सहित वापस किया जाए।

इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। प्रारंभिक अंतरिम राहत मिलने के बावजूद बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 26 हजार शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की नौकरियां समाप्त हो गईं।

प्रदर्शनकारी अब राज्य सरकार से मांग कर रहे हैं कि उपलब्ध रिकॉर्ड, विशेष रूप से ओएमआर शीट, के आधार पर वास्तविक योग्य उम्मीदवारों की पहचान कर उन्हें शीघ्र नौकरी पर बहाल किया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय