अदालत की डेडलाइन के बावजूद नहीं हुआ जलपाईगुड़ी नगरपालिका बोर्ड का गठन, प्रशासक के हाथों में ही रहेगा नियंत्रण
जलपाईगुड़ी, 14 अक्टूबर (हि. स.)। जलपाईगुड़ी नगरपालिका में चेयरमैन के चुनाव और नए बोर्ड के गठन को लेकर जारी राजनीतिक खींचतान के बीच बुधवार को भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। अदालत द्वारा निर्धारित समयसीमा के बावजूद कोई तृणमूल कांग्रेस पार्षद बोर्ड गठन की बैठक में शामिल होने नहीं पहुंचा। ऐसे में नगरपालिका का नियंत्रण फिलहाल प्रशासक के हाथों में ही रहने की संभावना है।
कोतवाली थाना पुलिस और केंद्रीय बलों की कड़ी सुरक्षा के बीच बुधवार को नगरपालिका का गेट खुला रहा, लेकिन निर्धारित समय पर बैठक में कोई तृणमूल पार्षद नहीं पहुंचा। इसके बजाय ममता बनर्जी समर्थक पार्षदों ने बेगुनटारी स्थित पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। उनका दावा था कि कम से कम 17 पार्षद उनके साथ हैं, लेकिन बैठक में केवल तीन पार्षद और कुछ जिला स्तरीय नेता ही उपस्थित हुए।
वार्ड नंबर 15 के पार्षद तपन बनर्जी और वार्ड नंबर 18 के पार्षद उत्तम बोस ने आरोप लगाया कि भाजपा की धमकी के कारण पार्षद बैठक में आने की हिम्मत नहीं जुटा सके। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।
भाजपा के जिला उपाध्यक्ष बुबाई कर ने पलटवार करते हुए कहा कि तृणमूल के पास चेयरमैन चुनने के लिए आवश्यक बहुमत नहीं था और अपनी नाकामी छिपाने के लिए भाजपा पर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन सैकत चटर्जी ने भी तृणमूल के अंदरूनी विवाद पर तंज कसा है। ममता समर्थक पार्षदों के दबाव के कारण पहले अपना पद गंवा चुके सैकत ने चेयरमैन पद के दावेदार तपन बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि दो-तीन बार जन्म लेने पर भी तपन बाबू नगरपालिका के चेयरमैन नहीं बन पाएंगे।
अदालत की निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव और बोर्ड गठन नहीं होने से नगरपालिका में राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ गई है। फिलहाल प्रशासक मिहिर कर्मकार के हाथों में नगरपालिका का नियंत्रण बने रहने की संभावना है।
माना जा रहा है कि 2027 में होने वाले नगरपालिका चुनाव तक यही व्यवस्था जारी रह सकती है। अब शहरवासियों की नजर इस बात पर है कि राजनीतिक खींचतान के बीच आम लोगों को प्रभावित करने वाली नागरिक सेवाओं में सुधार हो पाता है या नहीं।
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार

