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वोटर लिस्ट : बंगाल की 34 प्रतिशत सीटों पर नए मतदाताओं का शून्य आवेदन, सीमावर्ती जिलों में सबसे बुरा हाल

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वोटर लिस्ट : बंगाल की 34 प्रतिशत सीटों पर नए मतदाताओं का शून्य आवेदन, सीमावर्ती जिलों में सबसे बुरा हाल


कोलकाता, 02 मार्च (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन शनिवार को कर दिया गया, जिसमें कई बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों में से 99 निर्वाचन क्षेत्रों में इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एक भी नया मतदाता नहीं जुड़ा है। पिछले साल दिसंबर में एसआईआर की शुरुआत से लेकर अंतिम सूची के प्रकाशन तक, इन क्षेत्रों में फॉर्म-छह के माध्यम से नाम जोड़ने के लिए एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। इसका सीधा मतलब यह है कि राज्य की लगभग 34 प्रतिशत सीटों पर नए मतदाताओं ने पंजीकरण में कोई रुचि नहीं दिखाई है।

शून्य आवेदन वाले इन 99 निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे अधिक मामले बांग्लादेश की सीमा से सटे नदिया जिले में देखे गए हैं, जहां ऐसी 14 सीटें शामिल हैं।

निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने के समय से ही मतदाताओं को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाए गए थे, लेकिन ऐसा लगता है कि कई क्षेत्रों में लोगों ने इन अपीलों पर ध्यान नहीं दिया। हालांकि, निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि अभी भी फॉर्म-छह जमा करने के लिए पर्याप्त समय बचा है। विधानसभा चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि तक मतदाता अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं, इसलिए आने वाले समय में इन आंकड़ों में बदलाव होने की संभावना बनी हुई है।

इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान केवल नाम जुड़ने का ही मामला चर्चा में नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर नामों को हटाया भी गया है। शनिवार को जारी सूची के मुताबिक, अब तक कुल 61 लाख 78 हजार 245 नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। यह संख्या अभी और बढ़ सकती है क्योंकि लगभग 60 लाख अन्य मतदाताओं के पहचान दस्तावेजों की न्यायिक अधिकारियों द्वारा जांच की जा रही है।

दिलचस्प बात यह है कि जिन मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच लंबित है, उनमें से अधिकतर मामले बांग्लादेश की सीमा से लगे तीन जिलों मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर 24 परगना से जुड़े हैं। इनमें से मुर्शिदाबाद और मालदा अल्पसंख्यक बहुल जिले माने जाते हैं, जहां फिलहाल दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया काफी गहनता से चल रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर