शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल के वोट-ऑन-अकाउंट को बताया ‘झूठा और दिशाहीन दस्तावेज’
कोलकाता, 05 फ़रवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को राज्य सरकार के वोट-ऑन-अकाउंट पर तीखा हमला बोलते हुए इसे “झूठा और उद्देश्यहीन दस्तावेज” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें किए गए अधिकांश वादे चुनावी हैं और कानूनी रूप से लागू ही नहीं किए जा सकते।
अंतरिम बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए अधिकारी ने कहा कि बजट की कई घोषणाएं भ्रामक हैं, क्योंकि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद इन्हें अमल में नहीं लाया जा सकेगा।
उल्लेखनीय है कि, राज्य सरकार ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4.06 लाख करोड़ का अंतरिम बजट विधानसभा में पेश किया, जिसमें महिलाओं, युवाओं और फ्रंटलाइन कर्मियों के लिए नकद सहायता और भत्तों में बढ़ोतरी की घोषणाएं की गई हैं। राज्य में विधानसभा चुनाव तीन महीने से भी कम समय में होने हैं।
अधिकारी ने कहा कि 14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद किसी भी समय आदर्श आचार संहिता लागू हो सकती है। इसके तहत सरकार न तो वित्तीय लाभ बढ़ा सकती है और न ही लाभार्थियों की संख्या का विस्तार कर सकती है।
उन्होंने कहा कि वोट-ऑन-अकाउंट केवल चार महीने की अस्थायी व्यवस्था होता है, जिसका उद्देश्य वेतन जैसे नियमित खर्चों को पूरा करना है। अप्रैल से लागू होने की बात कहे जा रहे वादों को उन्होंने “सीधा धोखा” बताया।
नेता प्रतिपक्ष ने बजट को “बेरोजगार विरोधी” बताते हुए कहा कि इसमें रोजगार सृजन के लिए कोई ठोस लक्ष्य नहीं है। उन्होंने ‘युवाश्री’ योजना का नाम बदलकर ‘युवा साथी’ किए जाने और इसके तहत 1,500 रुपये मासिक भत्ता दिए जाने की घोषणा को “शब्दों का खेल और छल” करार दिया। उनका आरोप था कि नाम बदलने के जरिए पुरानी अधूरी घोषणाओं को ढकने की कोशिश की जा रही है।
महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर भी अधिकारी ने अंतरिम बजट को मौन बताया और कहा कि सरकार बुनियादी सामाजिक समस्याओं से ध्यान भटका रही है।
उन्होंने दावा किया कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार बनती है, तो ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की जाएगी और सहायता राशि को तीन हजार प्रतिमाह तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही, उन्होंने वादा किया कि भाजपा सरकार बनने पर छह महीने के भीतर नौकरी से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान किया जाएगा।
शुभेंदु अधिकारी ने आशा और आईसीडीएस स्वयंसेवकों, डाटा एंट्री ऑपरेटरों, ग्राम संसाधन कर्मियों और वेबेल के माध्यम से जुड़े परिवहन चालकों व ठेकेदारों सहित संविदा और तृतीय-पक्ष कर्मचारियों के लिए किसी ठोस प्रावधान के अभाव की भी आलोचना की।
चार प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार छठे वेतन आयोग का हवाला दे रही है, जबकि अब तक सातवें वेतन आयोग का गठन ही नहीं किया गया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार 31 मार्च तक महंगाई भत्ते के बकाया के रूप में सरकार पर करीब 10,400 करोड़ रुपये जुटाने का दबाव बनेगा।
राजस्व बढ़ोतरी के लिए किसी स्पष्ट रोडमैप के अभाव का आरोप लगाते हुए अधिकारी ने कहा कि यह वोट-ऑन-अकाउंट राज्य को आर्थिक ठहराव की ओर धकेल देगा। उन्होंने कहा, “फ़रवरी में लक्ष्मी भंडार की किश्त के अलावा इस बजट में कुछ भी ठोस नहीं है।”---------------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

