पश्चिम बंगाल के 205 बीएड कॉलेजों में नए सत्र के दाखिले पर रोक
कोलकाता, 05 नवंबर (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में शिक्षा के नाम पर डिग्री बेचने वाले संस्थानों के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है। राज्य के 205 बीएड कॉलेजों में आगामी 2026-27 शिक्षण सत्र के लिए विद्यार्थियों के दाखिले पर रोक लगा दी गई है। इन कॉलेजों को निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरने के कारण अयोग्य चिह्नित किया गया है। इसके अलावा 14 आईटीआई, 38 फार्मा कॉलेज और एक पॉलिटेक्निक संस्थान में भी नए विद्यार्थियों के दाखिले स्थगित कर दिए गए हैं। गुरुवार को राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक निर्देशिका जारी की गई।
उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चटर्जी ने बताया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ने विकास भवन में स्पष्ट कहा था कि शिक्षा को किसी भी कीमत पर व्यापार नहीं बनने दिया जाएगा और शिक्षण संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता होगी।
इसी निर्देश के तहत उच्च शिक्षा विभाग और तकनीकी शिक्षा विभाग ने संयुक्त रूप से बीएड, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और फार्मा कॉलेजों में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया। पहले चरण में 156 बीएड कॉलेजों को विद्यार्थियों के दाखिले की अनुमति दी गई थी। वहीं, निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने वाले 415 बीएड कॉलेजों को बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए 21 दिनों का कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इनमें से नौ कॉलेजों ने नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया।
मंत्री ने बताया कि दूसरे चरण के निरीक्षण के बाद 2026-28 शिक्षण सत्र के लिए 237 बीएड कॉलेजों को विद्यार्थियों के दाखिले की अनुमति दी गई है। शेष 205 कॉलेज आवश्यक गुणवत्ता और निर्धारित मानकों को पूरा करने में विफल रहे। इसी कारण इन संस्थानों में नए विद्यार्थियों के दाखिले पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने आगे बताया कि राज्य के 265 आईटीआई संस्थानों में से 14, कुल 134 फार्मा कॉलेजों में से 38 और 74 पॉलिटेक्निक संस्थानों में से एक में भी विद्यार्थियों के दाखिले स्थगित कर दिए गए हैं।
सरकार के इस फैसले से संबंधित संस्थानों में पढ़ने की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। वहीं, इन संस्थानों से जुड़े शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के सामने भी रोजगार को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।
इस संबंध में बंगीय शिक्षक एवं शिक्षाकर्मी समिति के महासचिव स्वपन मंडल ने कहा कि राज्य में एक साथ 275 बीएड कॉलेजों के बंद होने से शिक्षा क्षेत्र में संकट पैदा हो सकता है। इतने बड़े पैमाने पर कॉलेजों के प्रभावित होने से वहां कार्यरत कर्मचारियों और विद्यार्थियों का भविष्य अनिश्चित हो जाएगा। इसके साथ ही योग्य शिक्षकों की उपलब्धता में भी कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

