नाम और चुनाव चिन्ह पर आयोग के फैसला नहीं आने के बावजूद कालीघाट तृणमूल उम्मीदवारों के नामांकन पर संशय
कोलकाता, 14 सितंबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में आगामी उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर है, लेकिन उससे तीन दिन पहले ही कालीघाट तृणमूल कांग्रेस ने नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं।
नंदीग्राम से स्कूल शिक्षिका संचिता प्रधान दे और रेजीनगर से पूर्व विधायक रबिउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया गया है। हालांकि, तृणमूल में दो गुट होने की वजह से चुनाव आयोग ने चुनाव चिन्ह को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की है और बुधवार को नामांकन का आखिरी दिन है इसलिए इन उम्मीदवारों के नामांकन को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। दोनों सीटों पर तृणमूल कांग्रेस के किस गुट को घासफूल चुनाव चिन्ह मिलेगा, इस पर निर्वाचन आयोग का फैसला अभी नहीं आया है।
कालीघाट तृणमूल कांग्रेस ने रविवार को नंदीग्राम और रेजीनगर के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की। नंदीग्राम से उम्मीदवार बनाई गईं संचिता प्रधान दे पेशे से शिक्षिका हैं और पहले पंचायत समिति की सदस्य रह चुकी हैं। वह पूर्व मिदनापुर जिले के बयाल इलाके की रहने वाली हैं। विधानसभा चुनाव में इस सीट से तृणमूल ने भाजपा से पार्टी में आए पवित्र कर को उम्मीदवार बनाया था।
रेजीनगर से उम्मीदवार बनाए गए रबिउल आलम चौधरी पहले भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 2013 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार रेजीनगर से जीत दर्ज की थी। 2016 में भी वह विजयी रहे। इसके बाद कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए और 2021 में घासफूल चुनाव चिन्ह पर तीसरी बार रेजीनगर से चुनाव जीता।
इस बीच तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह और पार्टी फंड पर अधिकार को लेकर कालीघाट तृणमूल और ऋतब्रत बनर्जी गुट के बीच विवाद निर्वाचन आयोग तक पहुंच गया है। शनिवार को आयोग ने दोनों गुटों के पांच-पांच प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठक की थी। इसके बाद रविवार को दोनों पक्षों को अलग-अलग पत्र भेजकर 16 सितंबर तक कुछ अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने को कहा गया है। आवश्यकता पड़ने पर 17 सितंबर को आयोग फिर बैठक या सुनवाई कर सकता है। जबकि 16 सितंबर को ही नामांकन का आखिरी दिन है।
कालीघाट तृणमूल कांग्रेस को उम्मीद है कि ममता बनर्जी द्वारा बनाया गया घासफूल चुनाव चिन्ह उसी के पास रहेगा। पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी ने रविवार को स्पष्ट कहा कि उपचुनाव में उनके उम्मीदवार जोड़ा फूल चुनाव चिन्ह पर ही चुनाव लड़ेंगे।
दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी गुट सोमवार को अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर सकता है। ऐसे में नामांकन की अंतिम तारीख से पहले दोनों गुटों के सामने चुनाव चिन्ह को लेकर स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा।
राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर भी चर्चा है कि आयोग अंतिम फैसला आने तक घासफूल चुनाव चिन्ह को अस्थायी रूप से रोक सकता है। ऐसी स्थिति में दोनों गुटों को उपचुनाव के लिए अलग-अलग अस्थायी नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए जा सकते हैं। यदि ऋतब्रत गुट को घासफूल चुनाव चिन्ह मिलता है तो कालीघाट तृणमूल को नंदीग्राम और रेजीनगर में किसी अन्य चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ना पड़ सकता है। इसके विपरीत फैसला होने पर ऋतब्रत गुट के सामने यही स्थिति होगी।
विशेषज्ञों के एक वर्ग के मुताबिक फिलहाल दस्तावेजों के मामले में कालीघाट तृणमूल कांग्रेस की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई दे रही है। हालांकि अंतिम फैसला निर्वाचन आयोग के दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों पर निर्भर करेगा।
नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होगा और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से तत्कालीन विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी चुनाव जीते थे। बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ दी, जिसके कारण वहां उपचुनाव हो रहा है।
इसी तरह नाओदा और रेजीनगर दोनों सीटों से आम जनता विकास पार्टी (एजेवीपी) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने विधानसभा चुनाव जीता था। उन्होंने नाओदा सीट अपने पास रखते हुए रेजीनगर सीट छोड़ दी, जिसके कारण वहां भी उपचुनाव कराया जा रहा है।
कालीघाट तृणमूल के अलावा रविवार को वाम मोर्चा और कांग्रेस ने भी दोनों सीटों के लिए अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए। नंदीग्राम में वाम मोर्चे की ओर से सीपीआई ने शांति गिरी और कांग्रेस ने मिलन प्रधान को उम्मीदवार बनाया है। रेजीनगर में आम जनता विकास पार्टी के टिकट पर हुमायूं कबीर के पुत्र गोलाम नबी आजाद चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस ने मोहम्मद अब्दुल्लाही काफ़ी और वाम मोर्चे ने सैयद असद अली को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने अभी दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

