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तृणमूल कांग्रेस में टूट की अटकलों के बीच ममता बनर्जी दिल्ली रवाना

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तृणमूल कांग्रेस में टूट की अटकलों के बीच ममता बनर्जी दिल्ली रवाना


कोलकाता, 07 जून (हि.स.)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रविवार दिल्ली रवाना हो गई हैं। सोमवार को दिल्ली में होने वाली इंडी गठबंधन में वह शामिल होंगी। इसके पहले शनिवार को ही उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी दिल्ली पहुंच गए थे। हालांकि, दोनों नेताओं के दौरे को पार्टी सांसदों की नाराजगी संभालने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

दरअसल, विधायकों में पहले से जारी असंतोष और कथित बगावत के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल में भी बड़ी टूट की अटकलें सामने आ रही हैं।

वहीं, चर्चा है कि अगले सप्ताह जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली में होने वाली इंडी गठबंधन की बैठक में शामिल होंगे, उसी दौरान पार्टी के कई सांसद अलग राह अपना सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर कम से कम 22 सांसद एक अलग गुट बनाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। यह गुट खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। एक तिहाई सांसदों के साथ आने के बाद उनके दावे पर मुहर भी लग सकती है।

इन अटकलों के बीच बताया जा रहा है कि सांसदों की संभावित बगावत का नेतृत्व बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर सकती हैं। हालांकि, अभी तक इस पर किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर लगातार जारी है।

इधर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए रखी है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी तथा प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य इस समय दिल्ली में मौजूद हैं। मीडिया से बातचीत में दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद लगातार उनके संपर्क में हैं।

शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि लगातार फोन कॉल आ रहे हैं और तृणमूल कांग्रेस के सांसद संपर्क साध रहे हैं। उनके अनुसार पार्टी अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी है और आने वाले समय में इसका प्रभाव तेजी से घट सकता है।

भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव लॉकेट चटर्जी ने भी दावा किया है कि चुनाव परिणामों के बाद से कई सांसद लगातार एसएमएस, व्हाट्सऐप और फोन के जरिए संपर्क में हैं और राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

अगर ये राजनीतिक अटकलें सच साबित होती हैं तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह अब तक का सबसे बड़ा सियासी उलटफेर माना जाएगा। फिलहाल, सभी की निगाहें दिल्ली में होने वाली आगामी बैठकों और सांसदों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।-------------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर