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चुनाव घोषणा के बाद बंगाल में प्रशासनिक फेरबदल पर सियासत तेज

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चुनाव घोषणा के बाद बंगाल में प्रशासनिक फेरबदल पर सियासत तेज


कोलकाता, 16 मार्च (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के 24 घंटे के भीतर राज्य प्रशासन और पुलिस के शीर्ष स्तर पर किए गए बड़े फेरबदल को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य के मुख्य सचिव और गृह सचिव को हटाने के बाद सत्तारूढ़ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है।

रविवार को बंगाल में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को उनके पदों से हटा दिया। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर और भी कई बदलाव किए गए, जिससे राज्य की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। इस फैसले के विरोध में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने संसद में भी विरोध दर्ज कराया।

डेरेक ओ’ब्रायन, सागरिका घोष और नदीमुल हक समेत पार्टी के सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया। बाद में सागरिका घोष ने कहा कि आधी रात के समय इस तरह का फैसला लेना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व में एक निर्वाचित सरकार होने के बावजूद निर्वाचन आयोग अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा है।

इधर तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने भी इस फैसले को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। सोमवार सुबह पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि ये सारे तबादले दरअसल भाजपा की “पैनिक रिएक्शन” का नतीजा हैं। उनके मुताबिक भाजपा को बंगाल में अपनी संभावित हार का अंदेशा हो गया है, इसलिए वह निर्वाचन आयोग के जरिए जल्दबाजी में फैसले करवा रही है।

कुणाल घोष ने कहा कि भाजपा का बंगाल की जनता से कोई वास्तविक संबंध नहीं है और पार्टी को लोगों का समर्थन नहीं मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि चाहे जितने प्रशासनिक बदलाव कर लिए जाएं, लेकिन बंगाल की जनता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति लोगों के भरोसे को बदला नहीं जा सकता।

इस बीच निर्वाचन आयोग ने राज्य पुलिस के शीर्ष पदों पर भी बदलाव किया है। आयोग ने राज्य के पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे को हटाकर सिद्धनाथ गुप्ता को नया डीजीपी नियुक्त किया है। वहीं कोलकाता के पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार को पद से हटाकर उनकी जगह अजय कुमार नंदा को नियुक्त किया गया है।

चुनाव घोषणा के तुरंत बाद हुए इन प्रशासनिक और पुलिस स्तर के फेरबदल ने पश्चिम बंगाल की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है और इसे लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय