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आरजी कर अस्पताल के लिफ्ट में हुई मौत मामले में फोरेंसिक टीम ने जुटाए सबूत

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आरजी कर अस्पताल के लिफ्ट में हुई मौत मामले में फोरेंसिक टीम ने जुटाए सबूत


कोलकाता, 21 मार्च (हि.स.)। आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में लिफ्ट दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत के मामले में कोलकाता पुलिस ने जांच तेज कर दी है। शनिवार को फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने अस्पताल पहुंचकर ट्रॉमा केयर भवन की उस लिफ्ट से नमूने एकत्र किए, जिसमें खराबी आने से 20 मार्च को एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

फोरेंसिक टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि लिफ्ट अचानक नियंत्रण से बाहर क्यों हो गई और तकनीकी खराबी की असली वजह क्या थी। यह भी जांच की जा रही है कि क्या एक साथ कई बटन दबाने की वजह से लिफ्ट में गड़बड़ी हुई थी।

मृतक की पहचान दमदम निवासी अरूप बनर्जी के रूप में हुई है, जो अपने तीन वर्षीय बच्चे के इलाज के लिए अस्पताल आए थे। शुक्रवार तड़के वह अपनी पत्नी और बच्चे के साथ ट्रॉमा केयर यूनिट की लिफ्ट में फंस गए थे।

परिवार का आरोप है कि लिफ्ट पहले ऊपर जाने के बाद अचानक बेसमेंट तक नीचे गिर गई। बेसमेंट में एक बार दरवाजा खुलने पर उनकी पत्नी और बच्चा बाहर निकल गए, लेकिन अरूप के बाहर आने से पहले ही दरवाजा बंद हो गया और लिफ्ट फिर ऊपर जाने लगी।

इस दौरान अरूप लिफ्ट के दरवाजे में फंस गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। बेसमेंट में लिफ्ट के बाहर लोहे की ग्रिल का गेट बंद था। परिजनों का आरोप है कि अगर समय रहते ताला खोल दिया जाता तो उनकी जान बच सकती थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी गुहार के बावजूद कोई मदद के लिए आगे नहीं आया।

सरकारी अस्पतालों में आम तौर पर लिफ्ट के पास एक कर्मी की तैनाती होती है। ऐसे में इस लिफ्ट के पास कोई मौजूद क्यों नहीं था, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। घटना के दिन ही टाला थाने की पुलिस ने तीन लिफ्ट कर्मियों मिलन कुमार दास, बिस्वनाथ दास और मानस कुमार गुहा के साथ सुरक्षा कर्मियों अशरफुल रहमान और शुभदीप दास को गिरफ्तार किया था।

शनिवार को फोरेंसिक टीम ने संबंधित लिफ्ट के साथ-साथ उस स्थान से भी नमूने लिए जहां अरूप का शव मिला था तथा बेसमेंट क्षेत्र की भी जांच की गई। जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि लिफ्ट में पहले से कोई तकनीकी खराबी थी या नहीं और यदि थी तो उसे सेवा से बाहर क्यों नहीं किया गया।

प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार अरूप के हाथ, पैर और पसलियां टूट गई थीं, जबकि गंभीर चोट के कारण उनका हृदय, फेफड़े और यकृत भी क्षतिग्रस्त हो गए थे।

मृतक के परिजनों का आरोप है कि वे करीब डेढ़ से दो घंटे तक बेसमेंट में मौजूद लोहे की ग्रिल का ताला खोलने की गुहार लगाते रहे। परिवार का कहना है कि ताला तोड़ने के बजाय उसकी चाबी तलाश की जाती रही, जो कथित तौर पर लोक निर्माण विभाग के पास थी। उनका दावा है कि यदि तुरंत ताला तोड़ा जाता तो अरूप की जान बच सकती थी।

पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस बीच आरजी कर अस्पताल प्रशासन ने भी इस घटना को लेकर कई बैठकें की हैं और राज्य स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने की तैयारी कर रहा है।---------------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर