बंगाल की संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाएगी सरकार : पूर्णिमा चक्रवर्ती
कोलकाता, 04 अक्टूबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल सरकार राज्य की समृद्ध विरासत और संस्कृति को वैश्विक पटल पर पहचान दिलाने के लिए 'विरासत और संस्कृति आधारित पर्यटन' शुरू करने की योजना बना रही है। रविवार को कोलकाता के सत्यजीत रे सभागार में संस्कार भारती (पश्चिम बंगाल), भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद और मौलाना अबुल कलाम आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ एशियन स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
'वंदे मातरम' के 150 वें वर्ष के उपलक्ष्य में 'त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी' (देवी का आह्वान) नामक इस कार्यक्रम का उद्घाटन राज्य की सूचना, संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती ने किया। इस अवसर पर मंचित एक देशभक्ति नाटक ने वहां मौजूद सैकड़ों दर्शकों को भीतर तक झकझोर दिया और वे भावुक हो गए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती ने कहा कि पर्यटन के साथ-साथ राज्य की विरासत और संस्कृति का संरक्षण बेहद आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल धरोहरों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी समृद्ध संस्कृति को दुनिया भर के लोगों के सामने प्रस्तुत करना है। उन्होंने कहा कि बंगाल की विरासत सिर्फ अतीत का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण शक्ति है। दुर्गा पूजा को बंगाल की संस्कृति और पहचान का प्रतीक बताते हुए मंत्री ने कहा कि यह समाज को एक सूत्र में बांधती है, इसलिए हर पीढ़ी को इस अनमोल विरासत को सहेज कर रखना चाहिए।
पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि पिछले शासनकाल में बंगाल की संस्कृति और विरासत को नष्ट करने की गहरी साजिश रची गई थी। उन्होंने कहा कि संस्कृति के इसी अपमान और विनाशकारी प्रयासों के कारण ही जनता ने पिछली सरकार को सत्ता से बेदखल कर राज्य में एक राष्ट्रवादी सरकार का गठन किया है।
इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में ऋषि बंकिम चंद्र के ऐतिहासिक उपन्यास 'आनंदमठ' से प्रेरित होकर संस्कार भारती द्वारा 'मातृतीर्थेर सैनिक' (मातृभूमि के सैनिक) नामक नाटक का मंचन किया गया। इसी नाटक को देखकर सभागार में मौजूद दर्शक अपनी भावनाएं नहीं रोक सके। नाटक के अलावा इस भव्य कार्यक्रम में 150 स्वरों में 'वंदे मातरम' का विशेष सामूहिक गायन भी प्रस्तुत किया गया।
इस समारोह में विशिष्ट अतिथि के तौर पर सूचना एवं संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव डॉ. सौमित्र मोहन उपस्थित थे। साथ ही भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (कोलकाता) की निदेशक मधुर कंकना रॉय, मौलाना अबुल कलाम आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ एशियन स्टडीज के निदेशक डॉ. सरूप प्रसाद घोष, संस्कार भारती की अखिल भारतीय सचिव नीलांजना रॉय और कार्यक्रम अधिकारी अंशुमन पाल सहित कई गणमान्य अतिथियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

