दूसरे चरण से पहले पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 36 घंटे में एक हजार 95 अपराधी गिरफ्तार
कोलकाता, 27 अप्रैल (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने के बाद दूसरे चरण से पहले राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह तक चले 36 घंटे के विशेष अभियान और नाका जांच के दौरान कुल एक हजार 95 कथित ‘अपराधी’ या ‘संदिग्ध’ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। प्रशासनिक सूत्रों का दावा है कि अब तक कुल गिरफ्तारियों की संख्या बढ़कर एक हजार 543 हो चुकी है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिला-वार आंकड़ों में पूर्व बर्धमान सबसे ऊपर है, जहां 479 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उत्तर 24 परगना में 319, दक्षिण 24 परगना में 246 लोगों को हिरासत में लिया गया। वहीं कोलकाता उत्तर में 109, हुगली में 49, नदिया में 32 और हावड़ा में भी 32 लोगों को गिरफ्तार किए गए हैं।
इस बीच, इन गिरफ्तारियों को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। राज्य पुलिस के पूर्व महानिदेशक और तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद राजीव कुमार ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई मामलों में केवल पुलिस पर्यवेक्षकों की मौखिक शिकायत के आधार पर गिरफ्तारियां की गई हैं, जो चुनावी नियमों का उल्लंघन है।
चुनाव आयोग द्वारा जारी सूची में कुछ राजनीतिक चेहरों के नाम भी शामिल हैं। इनमें पूर्व बर्धमान के तृणमूल पार्षद नाड़ुगोपाल भकत की गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। हालांकि प्रशासन की ओर से उनकी गिरफ्तारी के सटीक कारणों पर विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, चुनाव से पहले संभावित अशांति को रोकने के लिए राज्यभर में ऐसे अभियान और तेज किए जाएंगे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य मतदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और शांतिपूर्ण चुनाव कराना है।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस पहले ही आरोप लगा चुकी है कि चुनाव आयोग और पुलिस मिलकर उनके कार्यकर्ताओं को ‘दागी’ करार देकर चुनाव से पहले गिरफ्तार कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में भी याचिकाएं दायर की गई हैं।
राजीव कुमार का दावा है कि 500 से अधिक गिरफ्तारियां केवल मौखिक शिकायतों के आधार पर की गईं, जो प्रक्रियागत रूप से सही नहीं है। उनका कहना है कि ऐसी कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर, ठोस सबूत और चार्जशीट के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीमा सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं पर ही अधिक निगरानी रखी जा रही है।
चुनाव से ठीक पहले हुई इस व्यापक कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जबकि प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय

