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लियोनेल मेसी कार्यक्रम में अव्यवस्था मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए मांगा और समय, 11 अगस्त को अगली सुनवाई

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लियोनेल मेसी कार्यक्रम में अव्यवस्था मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए मांगा और समय, 11 अगस्त को अगली सुनवाई


कोलकाता, 04 अगस्त (हि. स.)। अर्जेंटीना के फुटबॉल महानायक लियोनेल मेसी के पिछले वर्ष दिसंबर में कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम दौरे के दौरान अव्यवस्था और कुप्रबंधन के मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस ने कलकत्ता हाई कोर्ट से जांच रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को निर्धारित की है।

मंगलवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि बिधाननगर सिटी पुलिस में हाल में हुए प्रशासनिक फेरबदल के कारण जांच रिपोर्ट तैयार करने में देरी हुई है। इसी वजह से रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया गया।

यह मामला 13 दिसंबर को साल्ट लेक स्टेडियम में आयोजित लियोनेल मेसी के कार्यक्रम से जुड़ा है। कार्यक्रम के बाद बड़ी संख्या में दर्शकों ने आरोप लगाया था कि महंगे टिकट खरीदने के बावजूद वे मेसी की एक झलक तक नहीं देख सके। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद स्टेडियम परिसर में तोड़फोड़ और हंगामे की घटनाएं भी सामने आई थीं।

मामला बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए और आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया। इस मामले में राज्य के पूर्व खेल मंत्री अरूप विश्वास का नाम भी जांच के दायरे में आया है। हालांकि, हाई कोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी सहित किसी भी कठोर कार्रवाई से फिलहाल संरक्षण प्रदान किया है।

कार्यक्रम के आयोजक शतद्रु दत्ता, जिन्हें शुरुआती जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत मिल गई थी, ने आरोप लगाया कि अरूप विश्वास पूरे कार्यक्रम के दौरान मेसी के बेहद करीब मौजूद रहे, जिससे तय प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि मैदान पर प्रभावशाली लोगों की मौजूदगी के कारण टिकट लेकर आए दर्शकों का दृश्य बाधित हुआ।

घटना के बाद बिधाननगर दक्षिण थाना में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे। एक मामले में शतद्रु दत्ता की गिरफ्तारी हुई, जबकि दूसरे मामले में तोड़फोड़ और आगजनी के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

राज्य में राजनीतिक परिवर्तन के बाद अरूप विश्वास ने गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग करते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद अदालत ने मामले की नए सिरे से स्वतंत्र जांच कराने का निर्देश दिया और जांच समिति का गठन किया। अब अदालत ने बिधाननगर सिटी पुलिस को अगली सुनवाई से पहले जांच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर