बंगाल पुलिस हेडक्वार्टर से तीन महिला सिविक वॉलंटियरों के तबादले के आदेश से उठे सवाल
कोलकाता, 09 मार्च (हि. स.)। पश्चिम बंगाल पुलिस मुख्यालय से तीन महिला सिविक वॉलंटियरों के तबादले का आदेश जारी किए जाने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को इसकी पुष्टि की।
सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में औपचारिक निर्देश जारी किया गया है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में ऐसा कोई उदाहरण सामने नहीं आया है जब राज्य पुलिस मुख्यालय की ओर से सिविक वॉलंटियरों के तबादले का औपचारिक आदेश जारी किया गया हो।
दरअसल, सिविक वॉलंटियर राज्य पुलिस बल के नियमित सदस्य नहीं होते हैं। कोलकाता उच्च न्यायालय पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि सिविक वॉलंटियरों को कानून-व्यवस्था से जुड़े कार्यों में नियुक्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने अपने एक फैसले में यह भी कहा था कि उन्हें पुलिस के मुख्य कार्यों या अधिकारियों की आधिकारिक ड्यूटी में सहयोग के लिए नहीं लगाया जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय ने संवैधानिक रूप से यह स्पष्ट किया था कि सिविक वॉलंटियर पुलिसकर्मी नहीं हैं। इसके बावजूद तीन महिला सिविक वॉलंटियरों के तबादले का आदेश पुलिस मुख्यालय से जारी किया गया है। हालांकि तबादले के कारणों का अभी तक खुलासा नहीं किया गया है।
वाम मोर्चा सरकार के दौर में कोलकाता की सड़कों पर अक्सर ग्रीन पुलिस तैनात नजर आती थी। वर्ष 2011 में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद सरकार ने सिविक वॉलंटियरों की भर्ती का आदेश जारी किया।
शुरुआत में हावड़ा और आसनसोल पुलिस आयुक्तालयों में करीब दो हजार सिविक वॉलंटियरों की नियुक्ति की गई थी। इसके साथ ही राज्य में सिविक वॉलंटियरों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई।
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इनकी नियुक्ति आमतौर पर स्थानीय थानों के माध्यम से की जाती है, इसलिए इनका प्रशासनिक नियंत्रण सीधे राज्य पुलिस मुख्यालय से नहीं जुड़ा होता।
उधर राज्य विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस प्रशासन में कई स्तरों पर फेरबदल भी किए गए हैं। कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया गया है और विभिन्न थानों व पुलिस आयुक्तालयों में तैनात अधिकारियों को भी बदला गया है। ऐसे समय में तीन सिविक वॉलंटियरों के तबादले का आदेश जारी होना चर्चा का विषय बन गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

