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हालीशहर शमशान में हुआ मुकुल रॉय का अंतिम संस्कार, अभिषेक रहे मौजूद

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हालीशहर शमशान में हुआ मुकुल रॉय का अंतिम संस्कार, अभिषेक रहे मौजूद


कोलकाता, 23 फरवरी (हि.स.)। वरिष्ठ राजनीतिज्ञ मुकुल रॉय का अंतिम संस्कार सोमवार शाम उत्तर 24 परगना जिले के हालीशहर श्मशान घाट में कर दिया गया है। यह उनके आवास क्षेत्र बीजपुर से थोड़ी ही दूरी पर मौजूद है। यहां अंतिम संस्कार में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे व लाेकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु राय के साथ लगातार मौजूद रहे।

वर्ष 2021 के कोविड काल की एक घटना सोमवार को एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई। उस समय अलग-अलग राजनीतिक दलों में होने के बावजूद वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों की झलक देखने को मिली थी।

कोविड से स्वस्थ होने के कुछ ही समय बाद मुकुल रॉय की पत्नी कृष्णा रॉय गंभीर रूप से बीमार पड़ गई थीं और उन्हें ईएम बाइपास के समीप एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सूचना मिलते ही अभिषेक बनर्जी अस्पताल पहुंचे थे। उस दिन उनकी मुलाकात मुकुल रॉय से नहीं हो सकी थी, लेकिन उन्होंने उनके पुत्र शुभ्रांशु रॉय से बात कर परिवार को यह संदेश दिया था कि वे उनके साथ हैं। उस समय मुकुल रॉय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में थे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस में उनकी वापसी की पृष्ठभूमि कहीं न कहीं उसी आत्मीयता से तैयार हुई थी।

सोमवार को जब बंगाल की राजनीति में कभी ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले मुकुल रॉय के निधन की खबर फैली, तो राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। सूचना मिलते ही अभिषेक बनर्जी ने उनके पुत्र शुभ्रांशु को फोन कर संवेदना व्यक्त की और अंतिम संस्कार की व्यवस्था में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

यह सिर्फ शोक संदेश तक ही मामला सीमित नहीं रहा। अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया के दौरान अभिषेक बनर्जी मौजूद रहे। विधानसभा में जब मुकुल रॉय का पार्थिव शरीर लाया गया, तब पूर्व सहयोगियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। अभिषेक बनर्जी ने भी उनके चरण स्पर्श कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके बाद जब पार्थिव शरीर को अंतिम बार बीजपुर स्थित उनके आवास ले जाया गया, तब भी अभिषेक वहां पहुंचे। घर के बाहर समर्थकों और लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। बीजपुर से हालीशहर महाश्मशान तक निकाली गई शोक यात्रा में अभिषेक बनर्जी, पार्थ भौमिक और शिउली साहा सहित कई नेता मौजूद थे। हालीशहर महाश्मशान में ही मुकुल रॉय का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी मुकुल रॉय के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें अपना “दीर्घकालीन राजनीतिक सहयोगी” बताया। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक और लंबे समय तक सहयोगी रहने के बावजूद मुकुल रॉय के अंतिम संस्कार में वह शामिल नहीं हो सकीं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीते वर्षों में मतभेदों और राजनीतिक खींचतान के बावजूद, मुकुल रॉय के निधन के बाद बीते 24 घंटों की घटनाओं ने बंगाल की राजनीति में रिश्तों और समीकरणों की एक अलग तस्वीर सामने रख दी है।------------------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर