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ममता बनर्जी की मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक करने के मामले में एसएसकेएम अस्पताल को कानूनी नोटिस

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ममता बनर्जी की मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक करने के मामले में एसएसकेएम अस्पताल को कानूनी नोटिस


कोलकाता, 05 अक्टूबर (हि.स.)। मरीजों के स्वास्थ्य और उपचार से जुड़ी रिपोर्ट की गोपनीयता भंग करने के मामले ने पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में नया कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पांच साल पुरानी मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने के बाद अब कानूनी स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। किसी मरीज की अनुमति के बिना उसके गोपनीय मेडिकल दस्तावेज सार्वजनिक करने के औचित्य पर सवाल उठाते हुए ममता बनर्जी के अधिवक्ता अर्क नाग ने एसएसकेएम अस्पताल के निदेशक, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और संबंधित विभागाध्यक्ष को कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में पूछा गया है कि किस नियम और अधिकार के तहत ये गोपनीय चिकित्सा रिपोर्ट बाहर निकाली और सार्वजनिक की गईं।

यह पूरा मामला वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान नंदीग्राम में घटी एक घटना से जुड़ा है। उस समय नंदीग्राम सीट से प्रत्याशी रहीं तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बिरुलिया बाजार के पास चुनाव प्रचार के दौरान घायल हो गई थीं। उनके पैर में गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद उन्होंने पूरा चुनाव प्रचार व्हीलचेयर पर बैठकर ही किया था। उस दौरान विपक्ष ने इसे लेकर तीखी राजनीतिक टिप्पणियां की थीं और इस बात पर भी सवाल उठाए गए थे कि उनका पैर वास्तव में टूटा था या नहीं।

हाल ही में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नवान्न में संवाददाता सम्मेलन कर पूर्व मुख्यमंत्री पर झूठा दावा करने का आरोप लगाया था और पांच साल पुरानी मेडिकल रिपोर्ट दिखाते हुए दावा किया था कि उनके पैर में कोई फ्रैक्चर नहीं था। इस घटना के बाद मरीज के निजता अधिकार (प्राइवेसी) और मेडिकल काउंसिल के नियमों के उल्लंघन को लेकर विवाद गहरा गया है।

ममता के अधिवक्ता ने अस्पताल प्रशासन को भेजे नोटिस में इस बात की कड़ी जवाबदेही मांगी है कि अस्पताल के गोपनीय रिकॉर्ड से ये दस्तावेज कैसे और किसकी अनुमति से बाहर पहुंचे।----------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर