home page

ईपीएफओ की कार्रवाई से जूट मिल श्रमिकों में आक्रोश

 | 
ईपीएफओ की कार्रवाई से जूट मिल श्रमिकों में आक्रोश


पहले अच्छी रैंकिंग, फिर कार्रवाई

कोलकाता, 02 अक्टूबर (हि. स.)। जूट मिलों के पीएफ ट्रस्ट के लाइसेंस रद्द किए जाने की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। खासकर उन मिलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जिन्हें ईपीएफओ की प्रदर्शन रैंकिंग में बेहतर स्थान मिला था। बौरेया जूट मिल और गंगेज मैन्युफैक्चरिंग कंपनी इसका प्रमुख उदाहरण हैं। ईपीएफओ के उपलब्ध प्रदर्शन मूल्यांकन रिकॉर्ड में बौरेया जूट मिल का प्रदर्शन उच्च स्तर का दर्ज किया गया है।

पश्चिम बंगाल में पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 30 जनवरी 2026 को 16 जूट मिलों के पीएफ ट्रस्ट के लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया गया था। इस कार्रवाई को लेकर मिल प्रबंधन की ओर से अदालत का रुख किया गया। कुछ मामलों में अदालत से मिल प्रबंधन को राहत मिली है। नॉर्थ ब्रुक जूट मिल के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने लाइसेंस रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया है।

यहीं से एक अहम सवाल उठता है— अगर किसी जूट मिल का पीएफ ट्रस्ट ईपीएफओ के निर्धारित मानकों पर अच्छा प्रदर्शन कर रहा था, तो बाद में उसी ट्रस्ट का लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई किस आधार पर की गई?

ईपीएफओ की प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली में बौरेया जूट मिल का नाम बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिष्ठानों में दर्ज है। सितंबर 2024 की ईपीएफओ रैंकिंग में बौरेया जूट मिल को 545 अंक मिले थे और वह संबंधित सूची में 47वें स्थान पर थी। पुराने ईपीएफओ मूल्यांकन रिकॉर्ड में भी बौरेया और गंगेज मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के प्रदर्शन का उल्लेख मिलता है।

इसके बावजूद दोनों मिलों के पीएफ ट्रस्ट के लाइसेंस रद्द किए जाने की कार्रवाई ने श्रमिकों और मिल प्रबंधन के बीच चिंता पैदा की है।

श्रमिकों का कहना है कि भविष्य निधि उनकी वर्षों की मेहनत की बचत है और इससे जुड़े किसी भी प्रशासनिक फैसले का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है।

16 मिलों पर कार्रवाई

जिन 16 जूट मिलों के पीएफ ट्रस्ट के लाइसेंस रद्द किए जाने की बात सामने आई है, उनमें जगदल, कांकीनाड़ा, एंग्लो इंडिया, प्रवर्तक, ईस्टर्न मैन्युफैक्चरिंग, डलहौजी, गंगेज, शक्तिगढ़ (हेस्टिंग्स मिल), ग्लोस्टर, बाली, लडलो, टेपकॉन (श्री हनुमान मिल), बौरेया, एआई चंपदानी, बिड़ला कॉरपोरेशन (सूराह मिल) और न्यू सेंट्रल जूट मिल शामिल हैं।

इनमें कई मिलें राज्य के पारंपरिक जूट औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा हैं। भारतीय जूट मिल्स एसोसिएशन की मौजूदा सदस्य सूची में भी बौरेया, गंगेज, ग्लोस्टर, हेस्टिंग्स, जगदल, डलहौजी और अन्य प्रमुख जूट मिलें दर्ज हैं।

नॉर्थ ब्रुक के फैसले के बाद बढ़े सवाल

नॉर्थ ब्रुक जूट मिल के मामले में हाईकोर्ट के फैसले ने लाइसेंस रद्द करने की पूरी प्रक्रिया पर नए सिरे से सवाल खड़े किए हैं। यदि अदालत का फैसला अन्य समान मामलों में भी लागू होने योग्य आधार प्रस्तुत करता है, तो 16 अन्य मिलों के मामलों पर भी उसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि प्रत्येक मामले की कानूनी स्थिति अलग हो सकती है और अंतिम स्थिति संबंधित न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जूट मिलों को अपने कर्मचारियों के पीएफ के संचालन के लिए छूट प्राप्त ट्रस्ट चलाने की व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है। ऐसे में नियमों की व्याख्या और पुराने प्रावधानों तथा बाद में जोड़े गए नियमों के बीच सामंजस्य का प्रश्न भी महत्वपूर्ण हो गया है।

उद्योग और रोजगार पर असर

जूट उद्योग पश्चिम बंगाल के औद्योगिक और रोजगार परिदृश्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। केंद्र सरकार के जूट आयुक्त कार्यालय की सूची में भी पश्चिम बंगाल की बड़ी संख्या में जूट मिलें दर्ज हैं, जिनमें बौरेया, गंगेज, ग्लोस्टर, जगदल, डलहौजी, एंग्लो इंडिया और अन्य मिलें शामिल हैं।

ऐसे में पीएफ ट्रस्ट से जुड़े विवादों का असर केवल मिल प्रबंधन तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध हजारों श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा और भविष्य निधि से भी है। लाइसेंस रद्द होने की कार्रवाई से श्रमिकों में अपने पीएफ की सुरक्षा को लेकर चिंता और अविश्वास पैदा होने की बात सामने आ रही है।

नई सरकार के सामने चुनौती

मई 2026 में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में नई भाजपा सरकार ने कार्यभार संभाला है। नई सरकार के सामने जूट उद्योग को पुनर्जीवित करने, बंद मिलों को फिर से शुरू कराने और रोजगार बचाने के साथ-साथ पीएफ से जुड़े विवादों का समाधान करना भी महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे में ईपीएफओ और राज्य सरकार के बीच समन्वय तथा अदालतों में लंबित मामलों का शीघ्र समाधान जूट उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि नॉर्थ ब्रुक जूट मिल को राहत क्यों मिली। बड़ा सवाल यह है कि जिन 16 जूट मिलों के पीएफ ट्रस्ट के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, उनके मामलों की समीक्षा कब होगी? और यदि किसी मिल को पहले ईपीएफओ की अपनी मूल्यांकन प्रणाली में बेहतर प्रदर्शन के लिए स्थान मिला था, तो बाद में उसके खिलाफ की गई कार्रवाई का आधार क्या था?

हिन्दुस्थान समाचार / संतोष मधुप