जादवपुर के शोधार्थी निखिल दास से कथित उत्पीड़न पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने मांगी रिपोर्ट
कोलकाता, 01 सितंबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में जादवपुर विश्वविद्यालय के शोधार्थी निखिल दास के उत्पीड़न मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने कुलपति चिरंजीव भट्टाचार्य और कोलकाता पुलिस आयुक्त से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। दोनों से सात दिनों के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है। निर्धारित समय में रिपोर्ट नहीं मिलने पर आयोग ने समन जारी करने की चेतावनी दी है।
निखिल दास जादवपुर विश्वविद्यालय में जल संसाधन प्रबंधन विषय पर पीएचडी कर रहे हैं। वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की जादवपुर इकाई के अध्यक्ष भी हैं। दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप निवासी निखिल ने आरोप लगाया है कि 19 अगस्त को विश्वविद्यालय परिसर में उन्हें जातिसूचक टिप्पणी करते हुए निशाना बनाया गया। उनके साथ शारीरिक और मानसिक रूप से दुर्व्यवहार किया गया तथा जान से मारने की धमकी भी दी गई।
निखिल ने इस संबंध में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर आयोग ने जादवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति और कोलकाता पुलिस आयुक्त को पत्र भेजकर मामले में अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा मांगा है।
बताया जा रहा है कि अगस्त के तीसरे सप्ताह में जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में हुए विवाद और झड़प के दौरान निखिल दास का नाम सामने आया था। शोधार्थी ने आरोप लगाया कि वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े कुछ सदस्यों ने उनके साथ जातिगत भेदभाव किया। दूसरी ओर, एबीवीपी और वामपंथी छात्र संगठनों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए हैं।
इस विवाद के बीच निखिल से जुड़ा करीब एक दशक पुराना मामला भी फिर चर्चा में आया है। उस समय वह जादवपुर विश्वविद्यालय में सिविल इंजीनियरिंग के छात्र थे और विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कला विभाग की एक छात्रा के साथ कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। उन्हें कुछ दिनों तक हिरासत में भी रहना पड़ा था।
बाद में यह मामला धीरे-धीरे शांत हो गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उस समय परिसर में शांति बहाल करने को प्राथमिकता दी थी और छात्रों पर लगे आरोपों को लेकर आगे कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। शिकायतकर्ता छात्रा या विश्वविद्यालय से जुड़े अन्य लोगों की ओर से मामले को आगे नहीं बढ़ाए जाने के कारण पुलिस जांच भी प्रभावी रूप से आगे नहीं बढ़ सकी।
हालांकि, निखिल दास का दावा है कि उन्हें उस पुराने मामले में क्लीन चिट मिल चुकी है। वर्तमान में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की ओर से उनके साथ जातिगत उत्पीड़न की शिकायत पर विश्वविद्यालय और पुलिस से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

