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ग्रामीण आवास योजना में पारदर्शिता बढ़ाने काे पश्चिम बंगाल सरकार ने शुरू की ‘सेल्फ-सर्वे’

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ग्रामीण आवास योजना में पारदर्शिता बढ़ाने काे पश्चिम बंगाल सरकार ने शुरू की ‘सेल्फ-सर्वे’


कोलकाता, 06 जून (हि.स.)। पश्चिम बंगाल सरकार ने ग्रामीण आवास योजना के वास्तविक लाभार्थियों की पहचान को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त बनाने के लिए ‘सेल्फ-सर्वे’ प्रणाली लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था के तहत पात्र नागरिक स्वयं भी आवास योजना के लिए आवेदन कर सकेंगे। पूरी प्रक्रिया काे 20 जुलाई तक पूरी करने के लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

नबान्न (राज्य सचिवालय) के अनुसार, इस संबंध में सभी जिलों के जिलाधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। निर्देशों के मुताबिक आवेदकों को अपने मोबाइल फोन में ‘आवास प्लस 2024’ और ‘आधार फेस आरडी’ ऐप डाउनलोड कर आधार आधारित पहचान सत्यापन के जरिए आवेदन करना होगा। सर्वेक्षण और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया 20 जुलाई तक पूरी कर ली जाए। इसके लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को आवश्यक तैयारियां जल्द शुरू करने को कहा गया है।

ऑनलाइन आवेदन प्राप्त होने के बाद नियुक्त सर्वेयर संबंधित आवेदक के घर पहुंचकर जानकारी का सत्यापन करेंगे और निर्धारित मानकों के आधार पर पात्रता का आकलन करेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल ऑनलाइन आवेदन करने वाले ही प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होंगे। जो लोग तकनीकी या अन्य कारणों से स्वयं आवेदन नहीं कर पाएंगे, उनके लिए सर्वेयर घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे और पात्र परिवारों की पहचान करेंगे।

लाभार्थियों की सूची तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने त्रिस्तरीय सत्यापन प्रणाली भी लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत कम से कम 10 प्रतिशत मामलों का पुनः सत्यापन ब्लॉक या अनुमंडल स्तर के अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। वहीं, पांच प्रतिशत मामलों की समीक्षा ब्लॉक स्तर के अधिकारियों और दो प्रतिशत मामलों का प्रत्यक्ष सत्यापन जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा अनिवार्य रूप से किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से लाभार्थी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, डेटा की सटीकता सुनिश्चित होगी और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार, नई प्रणाली से राजनीतिक हस्तक्षेप या गलत जानकारी के आधार पर लाभार्थी सूची में नाम शामिल किए जाने जैसी शिकायतों में भी कमी आएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर