मिड-डे मील में फर्जी लाभार्थियों पर सख्ती, सरकारी स्कूलों में होंगे औचक निरीक्षण
कोलकाता, 07 अगस्त (हि.स.)। पश्चिम बंगाल सरकार ने मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) योजना में लाभार्थियों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राज्य के सरकारी स्कूलों में औचक निरीक्षण कराने का निर्णय लिया है। नवान्न से मिले निर्देशों के बाद विभिन्न जिला प्रशासन स्कूलों में वास्तविक छात्र संख्या और मिड-डे मील पोर्टल पर दर्ज छात्रों की संख्या का मिलान करेंगे।
सरकारी सूत्रों के अनुसार यदि किसी स्कूल में पोर्टल पर छात्रों की संख्या वास्तविक उपस्थिति से अधिक पाई जाती है, तो संबंधित स्कूल प्रबंधन, प्रिंसिपल या प्रधानाध्यापक को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कानूनी प्रावधानों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि लंबे समय से कुछ सरकारी स्कूलों द्वारा मिड-डे मील पोर्टल पर छात्रों की संख्या बढ़ाकर दर्ज किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। जांच में कुछ स्कूलों में ऐसी अनियमितताएं सामने भी आई हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
पूर्व मेदिनीपुर जिले के पटाशपुर-1 विकासखंड के एक सरकारी स्कूल में जांच के दौरान बड़ा अंतर सामने आया। यहां मिड-डे मील पोर्टल पर दर्ज छात्रों की संख्या वास्तविक संख्या से लगभग दस गुना अधिक पाई गई। शिकायत मिलने पर संबंधित खंड विकास अधिकारी ने औचक निरीक्षण किया, जिसके बाद स्कूल के प्रधानाध्यापक को कारण बताओ नोटिस जारी कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई।
उल्लेखनीय है कि, वर्ष 2022 में अप्रैल से सितंबर के बीच केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त समीक्षा समिति ने तत्कालीन राज्य सरकार पर मध्याह्न भोजन योजना के लाभार्थियों की संख्या बढ़ाकर दिखाने का आरोप लगाया था। समिति के अनुसार इससे 100 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई गई थी।
इसके अलावा पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में कई बार मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे थे। कुछ सरकारी स्कूलों में छात्रों को केवल चावल और नमक परोसे जाने की शिकायतें भी सामने आई थीं।
सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान राज्य सरकार का उद्देश्य योजना में सभी प्रकार की अनियमितताओं को समाप्त करना और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

