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पूर्व मंत्री इंद्रनील के घर से आपत्तिजनक उपकरण जब्त, 85 करोड़ के टेंडर घोटाले और 3.8 करोड़ नकदी जमा का पर्दाफाश

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पूर्व मंत्री इंद्रनील के घर से आपत्तिजनक उपकरण जब्त, 85 करोड़ के टेंडर घोटाले और 3.8 करोड़ नकदी जमा का पर्दाफाश


कोलकाता, 02 अक्टूबर (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन और मासआर्ट सोसाइटी से जुड़े 15 ठिकानों पर की गई छापेमारी में जांच एजेंसी को कई अहम सबूत और बड़ी सफलताएं हाथ लगी हैं। तलाशी और जब्ती अभियान के दौरान ईडी ने कई आपत्तिजनक डिजिटल उपकरण और महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य बरामद कर उन्हें विधिवत जब्त कर लिया है। ईडी की इस सघन जांच में दुर्गा पूजा के व्यवसायीकरण से लेकर सरकारी टेंडरों में हुई भारी वित्तीय हेराफेरी के पुख्ता सबूत जांच एजेंसी के हाथ लगे हैं।

जांच एजेंसी को हासिल हुए साक्ष्यों से इस बात का बड़ा खुलासा हुआ है कि मासआर्ट ने यूनेस्को के नाम, साख और लोगो का अनधिकृत एवं फर्जी तरीके से व्यावसायिक इस्तेमाल कर जनता से भारी रकम की उगाही की। आरोपितों ने कोलकाता के 24 चुनिंदा दुर्गा पूजा पंडालों में 'प्रिव्यू शो' के नाम पर आम जनता को 1,749 रुपये से लेकर 5,499 रुपये तक के महंगे टिकट बेचे। जांच में यह पुख्ता जानकारी मिली है कि अकेले वर्ष 2023 और 2024 के दौरान एक लाख से अधिक ऐसे टिकट जारी किए गए और टिकटों की बिक्री से प्राप्त धन को विविध खर्चों की आड़ में या सीधे नकद निकासी के जरिए निकाल लिया गया।

सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में ईडी को 85 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर घोटाले के स्पष्ट सुराग मिले हैं। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इंद्रनील सेन के मंत्री रहते हुए पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय के ये करोड़ों रुपये के टेंडर उनके करीबी सहयोगियों ध्रुबज्योति बोस और दीपेश रॉय के स्वामित्व वाली संस्थाओं को दिए गए थे। इसके बाद इन संस्थाओं ने इस धन को इंद्रनील सेन के रिश्तेदारों द्वारा नियंत्रित संस्थाओं में स्थानांतरित कर दिया, जहां से बड़े पैमाने पर नकदी की निकासी की गई।

वित्तीय लेन-देन की जांच में ईडी ने यह भी हासिल किया है कि पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन और उनके स्वामित्व वाली कंपनी 'मैसर्स ऑक्टेव रिकॉर्ड्स' के बैंक खातों में 3.8 करोड़ से अधिक की नकदी जमा की गई थी। इसके साथ ही एक और अहम जानकारी यह उजागर हुई है कि मैसर्स ऑक्टेव रिकॉर्ड्स के खाते से बैंकिंग चैनल के माध्यम से लगभग 30 लाख रुपये तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी ट्रांसफर किए गए थे।

हालांकि, इंद्रनील सेन ने दावा किया है कि यह रकम रॉयल्टी के रूप में चुकाई गई थी। ईडी अब जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों के आधार पर इस पूरे मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन) की गहराई से जांच कर रही है।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर