देबराज चक्रवर्ती के खिलाफ ईडी ने भी दर्ज किया मामला, आय से अधिक संपत्ति और वित्तीय अनियमितताओं की होगी जांच
कोलकाता, 02 जुलाई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष कार्यबल द्वारा बिधाननगर नगर निगम के पूर्व तृणमूल पार्षद देबराज चक्रवर्ती की गिरफ्तारी के एक दिन बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति, वित्तीय अनियमितताओं और अन्य मामलों की जांच के सिलसिले में मामला दर्ज किया है। देबराज चक्रवर्ती पूर्व तृणमूल कांग्रेस विधायक अदिति मुंशी के पति हैं।
ईडी के सूत्रों के अनुसार जांच केवल देबराज चक्रवर्ती के वित्तीय लेन-देन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनसे जुड़े प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी। जांच एजेंसी कथित जबरन वसूली सहित उनके खिलाफ लगे अन्य आरोपों की भी जांच करेगी।
सूत्रों का कहना है कि देबराज चक्रवर्ती के खिलाफ जांच की तैयारी काफी समय से चल रही थी। जांचकर्ताओं की नजर लंबे समय से उनकी कथित विशाल संपत्तियों और उनकी आय के स्रोतों पर थी। पार्षद रहते हुए इतनी बड़ी संपत्ति अर्जित करने को लेकर सवाल उठे थे। एजेंसी को संदेह है कि उनकी घोषित आय और वास्तविक संपत्ति के बीच बड़ा अंतर है।
कुछ सप्ताह पहले देबराज चक्रवर्ती और उनकी पत्नी अदिति मुंशी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। अदालत ने अदिति मुंशी की याचिका स्वीकार कर ली थी, जबकि देबराज चक्रवर्ती की याचिका खारिज कर दी गई थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि चुनाव के दौरान दाखिल शपथपत्र में देबराज चक्रवर्ती ने अपनी वास्तविक संपत्ति की तुलना में काफी कम संपत्ति घोषित की थी। तथ्यों के सत्यापन के बाद ईडी ने अब धन शोधन और ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति के पहलुओं की जांच शुरू कर दी है। आवश्यकता पड़ने पर एजेंसी पूछताछ के लिए उन्हें राज्य पुलिस की हिरासत से अपने कब्जे में लेने का भी अनुरोध कर सकती है।
प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि देबराज चक्रवर्ती का प्रभाव केवल उनके नगर निगम क्षेत्र तक सीमित नहीं था। वह उत्तर 24 परगना जिले के विभिन्न इलाकों, विशेषकर बसीरहाट उपमंडल में कई सरकारी परियोजनाओं के समन्वय और निगरानी से भी जुड़े रहे। इसी आधार पर उन परियोजनाओं से जुड़े वित्तीय लेन-देन और संभावित संबंधों की भी जांच की जा रही है।
ईडी के सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2011 के बाद देबराज चक्रवर्ती की तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व लाेकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगियों में गिनती होने लगी थी। बाद में उन्हें संगठन और प्रशासन से जुड़े कई विशेष दायित्व भी सौंपे गए थे। हालांकि इन तथ्यों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

