पश्चिम बंगाल बंगाल में कोयला खदान हादसे के बाद इसीएल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
कोलकाता, 15 मई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के आसनसाेल स्थित परासिया कोलियरी में हुए हादसे ने एक बार फिर कोयला खदानों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का ब्लास्ट बेहद दुर्लभ माना जाता है, लेकिन लापरवाही और तकनीकी चूक इसे घातक बना सकती है।
ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) में सेफ्टी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भूमिगत खदानों में कोयला निकालने के बाद छोड़े गए पिलरों को बाद में काटा जाता है। इसके बाद खाली स्थान को भरने के लिए मुख्य रूप से दो पद्धतियां अपनाई जाती हैं - स्टोइंग (बालू भराई) और केविंग। स्टोइंग पद्धति में पिलर काटते समय ही बालू भराई की जाती है और अंतिम पिलर हटने के बाद पूरे क्षेत्र को सील कर दिया जाता है, जिससे ब्लास्ट की संभावना बेहद कम रहती है। वहीं केविंग पद्धति में पिलर हटने के बाद छत अपने आप धंसकर खाली जगह को भर देती है।
अधिकारियों का कहना है कि जब लगभग (30×30) वर्ग मीटर क्षेत्र में 15-20 पिलर एक साथ धंसते हैं, तभी इस तरह की गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है। आमतौर पर छत धंसने से पहले पत्थरों के गिरने जैसे संकेत मिलते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
ईसीएल के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक सतीश झा ने बताया कि परासिया खदान में पिलर काटने के बाद बालू भराई का प्रावधान था, लेकिन इसे सही तरीके से नहीं किया गया। इसी कारण छत धंस गई और ब्लास्ट जैसी स्थिति बन गई। हादसे के समय वहां काम कर रहे श्रमिक गिर पड़े, जिसमें दवाई मुंडा नामक श्रमिक की सिर दीवार से टकराने के कारण मौत हो गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना की विस्तृत जांच की जाएगी और यह देखा जाएगा कि बालू भराई में कहां चूक हुई और सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया। उन्होंने दोहराया कि इसीएल में “पहले सुरक्षा, फिर उत्पादन” की नीति पर काम किया जाता है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मृतक श्रमिक के परिजनों को कुल सवा करोड़ रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की गई है। इसमें कंपनी की ओर से 25 लाख और कॉर्पोरेट सैलरी पैकेज के तहत बैंक बीमा से एक करोड़ रुपये शामिल हैं। इसके अलावा परिवार के एक सदस्य को नौकरी, पीएफ, ग्रेच्युटी और अन्य सभी देय राशि भी दी जाएगी। हालांकि, घायलों के लिए फिलहाल किसी विशेष पैकेज की घोषणा नहीं की गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

