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पश्चिम बंगाल में बाल विवाह पर सख्ती, छह महीने में 60 हजार नाबालिग लड़कियों के प्रसव का दावा

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पश्चिम बंगाल में बाल विवाह पर सख्ती, छह महीने में 60 हजार नाबालिग लड़कियों के प्रसव का दावा


कोलकाता, 7 सितंबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल सरकार ने बाल विवाह के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चलाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को नवान्न में मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में अधिकारियों को घर-घर जाकर नाबालिग लड़कियों के विवाह और गर्भधारण की पहचान करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि बाल विवाह में शामिल लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी, जेल और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ वापस लेने जैसी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बाल विवाह के मामलों में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 और पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। नाबालिग से विवाह करने वाले व्यक्ति के साथ-साथ विवाह कराने, करवाने या उसमें सहयोग करने वालों को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

अधिकारी के मुताबिक, राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में इस साल 1 जनवरी से 30 जून के बीच करीब 60 हजार संस्थागत प्रसव ऐसे दर्ज हुए, जिनमें लड़कियों की उम्र 18 वर्ष से कम थी। इनमें मुर्शिदाबाद सबसे आगे रहा, जहां छह महीने में 12,847 नाबालिग लड़कियों के संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए। इसके बाद दक्षिण 24 परगना में 4,178 मामले सामने आए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की किसी भी लड़की के गर्भवती होने या प्रसव की स्थिति की जानकारी प्रशासन को देना अनिवार्य होगा। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों का इस्तेमाल संदिग्ध बाल विवाह की पहचान करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के लिए किया जाएगा।

प्रस्तावित घर-घर अभियान में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी समन्वय के साथ काम करेंगे। नाबालिगों के गर्भधारण और अस्पतालों में हुए प्रसव से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर ऐसे परिवारों की पहचान की जाएगी, जहां बाल विवाह की आशंका हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन महिलाओं का विवाह नाबालिग अवस्था में हुआ है, उनके पति को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और पत्नी की उम्र का वैध प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा जाएगा। प्रमाण प्रस्तुत नहीं करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई के साथ गिरफ्तारी भी की जाएगी।

सरकार ने बाल विवाह कराने वाले पुरोहितों, काजी और अन्य मध्यस्थों को भी चेतावनी दी है। नाबालिग का विवाह कराने या उसमें सहयोग करने वालों के खिलाफ कानून के तहत जेल और जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत बाल विवाह को बढ़ावा देने, अनुमति देने या संपन्न कराने वालों को दो वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

अधिकारी ने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाए जाने पर, विवाह हुआ हो तब भी, पॉक्सो अधिनियम लागू होगा। उन्होंने कहा कि नाबालिग लड़कियों के गर्भधारण से जुड़े मामलों की विशेष रूप से कड़ी जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अभियान का दायरा केवल उन परिवारों तक सीमित नहीं रहेगा, जो नाबालिगों का विवाह कराते हैं। इसमें पति, बिचौलिये और विवाह संपन्न कराने वाले लोग भी कार्रवाई के दायरे में होंगे।

पश्चिम बंगाल में बाल विवाह का मुद्दा ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा है। 19वीं सदी में समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाने और महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने बाल विवाह और नाबालिगों के प्रसव से जुड़े आंकड़े केंद्र सरकार के साथ साझा नहीं किए। उन्होंने कहा कि अब प्रशासन बाल विवाह के मामलों को गंभीर अपराध के तौर पर लेते हुए संबंधित कानूनों के तहत पुलिस कार्रवाई और अभियोजन सुनिश्चित करेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर