एसआईआर पर भ्रम फैला कर जनादेश का अपमान कर रहा विपक्ष : मुख्यमंत्री
कोलकाता, 27 सितंबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और सीपीआई (एम) पर तीखा हमला बोला है। रविवार सुबह राज्य भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष हालिया चुनावों में जनता द्वारा दिए गए स्पष्ट जनादेश को खारिज करने के इरादे से जानबूझकर भ्रम और दुष्प्रचार फैला रहा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जिस तरह से सवाल उठाए जा रहे हैं, वह पूरी चुनावी व्यवस्था पर से लोगों का विश्वास खत्म करने की एक सुनियोजित साजिश है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एसआईआर से जुड़े फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ने अकेले नहीं लिए हैं, बल्कि यह चुनाव आयोग का सर्वसम्मत निर्णय था। इस प्रक्रिया में उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में न्यायिक अधिकारियों के माध्यम से सुनवाई और फैसले लिए गए हैं।
टीएमसी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो पार्टी खुद इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट गई थी, आज वह उसी न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है। 27 लाख नामों को लेकर चल रहे विवाद पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में न्यायिक अधिकारियों की अहम भूमिका थी और उनकी नियुक्ति अदालत के निर्देश पर हुई थी, इसलिए इसका पूरा दोष चुनाव आयोग या भाजपा पर मढ़ना पूरी तरह से गलत है।
टीएमसी और वामपंथियों के 'दोहरे मापदंड' को उजागर करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने चुनौती दी कि अगर एसआईआर वास्तव में लोकतंत्र विरोधी है, तो विपक्ष केरल में इसके खिलाफ आंदोलन क्यों नहीं करता। उन्होंने सवाल किया कि केरल में राजनीतिक समीकरण अलग होने के कारण वहां एसआईआर सही है, लेकिन बंगाल और बिहार में यह गलत कैसे हो गया।
इसके साथ ही उन्होंने टीएमसी और सीपीआई(एम) के बढ़ते राजनीतिक गठजोड़ पर भी तंज कसा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस टीएमसी का जन्म ही वामपंथी शासन के खिलाफ लड़ते हुए हुआ था, आज वही पार्टी विधानसभा से लेकर सड़क तक सीपीआई(एम) के साथ खड़ी नजर आ रही है। उन्होंने हाल ही में विधानसभा में हुए एक मतदान का जिक्र किया, जहां टीएमसी के एक गुट और सीपीआई(एम) के एकमात्र विधायक ने एक ही पक्ष में मतदान किया था।
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि एसआईआर को लेकर मचाया जा रहा यह पूरा बवाल असल में भ्रष्टाचार से जनता का ध्यान भटकाने की एक चाल है। उन्होंने कहा कि विपक्ष आवास योजना, सामाजिक सुरक्षा, भर्ती घोटाले, और कोयला-बालू व पशु तस्करी जैसे मामलों में चल रही जांच और कानूनी कार्रवाई से बौखलाया हुआ है।
श्रीरामपुर में ममता बनर्जी की हालिया सभा का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि वहां लोगों की नगण्य उपस्थिति ने इस आंदोलन की सच्चाई उजागर कर दी है। टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न में हुए हालिया बदलावों और पार्टी के विभाजन (ममता एआईटीसी) की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि आम जनता के सामने विपक्ष की राजनीतिक स्थिति पूरी तरह से अस्पष्ट हो चुकी है।
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग पर हमला करने और जनादेश का अपमान करने की यह राजनीति ज्यादा दिन नहीं चलेगी, क्योंकि बंगाल की जनता सब कुछ देख और समझ रही है।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

