रक्त की जरूरत के समय केवल मानवीय पहचान ही महत्वपूर्ण : शारद्वत मुखोपाध्याय
कोलकाता, 01 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के अवसर पर गुरुवार को स्वास्थ्य भवन में स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल की ओर से एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर उपस्थित स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने कहा कि रक्तदान के समय अथवा रक्त की आवश्यकता होने पर रक्तदाता की जाति, धर्म या राजनीतिक पहचान नहीं देखी जाती बल्कि केवल मानवीय पहचान महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने कहा कि रक्तदाता को यह पता नहीं होता कि उसका रक्त किसकी जान बचाएगा। वही रक्त किसी माता-पिता, दादा-दादी या बच्चे के लिए जीवनरक्षक बन सकता है। उन्होंने नियमित स्वैच्छिक रक्तदान की अपील करते हुए कहा कि स्वस्थ व्यक्ति द्वारा दिया गया रक्त शरीर निश्चित समय में फिर से बना लेता है, इसलिए रक्तदान का महत्व अन्य कई तरह के दान से अलग है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और एनसीसी के छात्र-छात्राओं सहित नियमित रक्तदाताओं के योगदान की सराहना की। साथ ही कानून के अनुरूप रक्तदान सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने एक निजी ब्लड बैंक का उदाहरण देते हुए बताया कि प्रलोभन देकर 13 वर्षीय बच्चे से रक्त लिया गया था। उन्होंने ऐसी अनियमितताओं के प्रति सतर्क रहने की अपील की।
कार्यक्रम में सौ से अधिक बार रक्तदान करने वाले कई रक्तदाताओं को सम्मानित किया गया। स्वास्थ्य भवन में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर भी लगाया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव नारायण स्वरूप निगम, डॉ. इंद्रजीत साहा, डॉ. स्वपन सोरेन, डॉ. निताईचंद्र मंडल, डॉ. विजयप्रसाद मुखोपाध्याय सहित विभागीय अधिकारी और एनसीसी के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। डॉ. स्वपन सोरेन ने लोगों से स्वेच्छा से रक्तदान करने की अपील की। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष मधुप

