home page

बंगाल विधानसभा चुनाव : घोषणा पत्र में क्षेत्रवार मुद्दों पर भाजपा का जोर, उत्तर बंगाल के लिए अलग संकल्प पत्र की तैयारी

 | 
बंगाल विधानसभा चुनाव : घोषणा पत्र में क्षेत्रवार मुद्दों पर भाजपा का जोर, उत्तर बंगाल के लिए अलग संकल्प पत्र की तैयारी


कोलकाता, 25 फरवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने चुनावी घोषणा पत्र की तैयारी में सूक्ष्म और क्षेत्र विशेष के मुद्दों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार इस बार केवल राज्यव्यापी बड़े मुद्दों तक सीमित रहने के बजाय अलग-अलग इलाकों की स्थानीय समस्याओं और अपेक्षाओं को प्रमुखता दी जा रही है।

पार्टी की राज्य समिति के एक सदस्य, जो घोषणा पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से जुड़े हैं, ने बताया कि वर्तमान जटिल राजनीतिक परिस्थितियों में कुछ व्यापक मुद्दे ऐसे हैं जो पूरे राज्य में समान रूप से लागू होते हैं, लेकिन इसके साथ ही अनेक क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां विशिष्ट स्थानीय समस्याएं मौजूद हैं। इसलिए इस बार घोषणा पत्र में सूक्ष्म स्तर के क्षेत्रीय मुद्दों को रेखांकित करने और उनके समाधान का स्पष्ट खाका प्रस्तुत करने की रणनीति अपनाई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी उत्तर बंगाल के आठ जिलों, कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और मालदा के लिए एक अलग लघु घोषणा पत्र जारी करने की तैयारी में है। राज्यव्यापी मुख्य और विस्तृत घोषणा पत्र के अतिरिक्त यह विशेष घोषणा पत्र केवल उत्तर बंगाल की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं पर केंद्रित होगा।

विधानसभा में भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक और सिलीगुड़ी विधानसभा क्षेत्र से विधायक शंकर घोष ने कहा कि उत्तर बंगाल के लिए अलग घोषणा पत्र की योजना वहां के लोगों की जरूरतों, मांगों और आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि पार्टी इस समय “संकल्प पत्र परामर्श यात्रा” कार्यक्रम चला रही है, जिसके तहत राज्य के विभिन्न स्थानों पर मतदाताओं के सुझाव प्राप्त करने के लिए ड्रॉप बॉक्स लगाए गए हैं। उत्तर बंगाल से प्राप्त महत्वपूर्ण सुझावों के आधार पर ही वहां के लिए पृथक घोषणा पत्र लाने की योजना पर काम हो रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, उत्तर बंगाल के लिए अलग घोषणा पत्र की रणनीति के पीछे चुनावी गणित भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। दक्षिण बंगाल में जहां तृणमूल कांग्रेस का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक रहा है, वहीं उत्तर बंगाल में भाजपा को पूर्व में उल्लेखनीय सफलता मिली थी। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने अधिकांश जिलों में बढ़त बनाई थी, लेकिन उत्तर बंगाल में भाजपा ने 54 में से 30 विधानसभा सीटें जीतकर अपना वर्चस्व कायम रखा था।

विश्लेषकों के अनुसार, आगामी चुनाव में उत्तर बंगाल में अपनी बढ़त बनाए रखना भाजपा के लिए रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में क्षेत्र विशेष के मुद्दों को अलग से रेखांकित करने और स्थानीय अपेक्षाओं को संबोधित करने की यह पहल पार्टी की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है। ---------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर