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तृणमूल के कार्यकाल में ग्रंथपालों की भर्ती में भी भ्रष्टाचार के आरोप, मंत्री ने कहा- किसी को नहीं बख्शेंगे

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तृणमूल के कार्यकाल में ग्रंथपालों की भर्ती में भी भ्रष्टाचार के आरोप, मंत्री ने कहा- किसी को नहीं बख्शेंगे


कोलकाता, 12 अगस्त (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त ग्रंथालयों में हुई ग्रंथपालों की नियुक्तियों पर भी अब भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की तैयारी है। राज्य के ग्रंथालय मंत्री गौरीशंकर घोष ने स्पष्ट किया है कि नियुक्तियों से संबंधित पुरानी फाइलें खोली जाएंगी और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

जानकारी के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के करीब 15 वर्षों के शासन के दौरान राज्य में लगभग 550 ग्रंथपालों की नियुक्ति हुई। वर्ष 2021 में विधानसभा चुनाव से पहले 738 रिक्त पदों पर नियुक्ति की मंजूरी दी गई थी, लेकिन वर्ष 2025 तक इनमें से केवल करीब 550 पदों पर ही नियुक्तियां हो सकीं। इन नियुक्तियों में भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे।

राज्य में ग्रंथालयों की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। पश्चिम बंगाल में 2,467 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त सामान्य ग्रंथालय हैं। इनमें ग्रंथपालों समेत कुल 5,520 स्वीकृत पद हैं, लेकिन 4,100 से अधिक पद फिलहाल खाली पड़े हैं। कर्मचारियों की भारी कमी के कारण करीब 1,300 ग्रंथालय आंशिक या पूरी तरह बंद हो चुके हैं।

कई इलाकों में एक ही ग्रंथपाल को दो, तीन और यहां तक कि चार ग्रंथालयों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। लंबे समय तक ग्रंथालयों के बंद रहने और कोरोना महामारी के प्रभाव के कारण राज्य के विभिन्न सामान्य ग्रंथालयों में करीब 10 लाख पुस्तकों के नष्ट होने की बात भी सामने आई है। कर्मचारियों की कमी के कारण जहां नियमित सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, वहीं महत्वपूर्ण पुस्तकों और अन्य संसाधनों के संरक्षण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

इसी बीच राज्य सरकार ने भविष्य में ग्रंथपालों की भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करने का फैसला किया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, अब ग्रंथपालों की भर्ती स्कूल सेवा आयोग के माध्यम से कराने की तैयारी है। नई व्यवस्था में जिलों की स्थानीय ग्रंथालय प्राधिकरण समितियों के सदस्यों की भूमिका नहीं होगी। सरकार का लक्ष्य अप्रैल 2027 तक करीब 500 ग्रंथपालों की नियुक्ति करना है।

हाल ही में ओरिएंटल लाइब्रेरी एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी ग्रंथालयों की समस्याओं को लेकर मंत्री गौरीशंकर घोष से मुलाकात की थी। संगठन के अध्यक्ष प्रणब हाजरा ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने सामान्य ग्रंथालयों की सेवाओं को सुचारु करने, कर्मचारियों की कमी दूर करने सहित विभिन्न मांगें मंत्री के सामने रखीं। इसके साथ ही पिछली सरकार के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों में कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग भी की गई।

मंत्री गौरीशंकर घोष ने कहा कि ग्रंथालयों में कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए अब हर साल नियुक्तियां की जाएंगी। उन्होंने कहा कि एक साल में राज्य के सभी ग्रंथालयों को पूरी तरह सक्रिय करना संभव नहीं है, लेकिन चरणबद्ध तरीके से व्यवस्था को पटरी पर लाया जाएगा।

पिछली सरकार के कार्यकाल में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर मंत्री ने कहा कि ग्रंथालय व्यवस्था में कई स्तरों पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि किताबों की खरीद से लेकर पुस्तक मेलों तक में भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। इन सभी मामलों की जांच कराई जाएगी।

मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुरानी फाइलें खोली जाएंगी और जहां भी भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलेंगे, वहां कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर