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बंगाल चुनाव 2026 : स्वर्ण पदक विजेता स्वप्ना बर्मन की तृणमूल उम्मीदवारी पर फंसा पेंच

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बंगाल चुनाव 2026 : स्वर्ण पदक विजेता स्वप्ना बर्मन की तृणमूल उम्मीदवारी पर फंसा पेंच


कोलकाता, 26 मार्च (हि.स.)। एशियन गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता स्वप्ना बर्मन की अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ओर से जलपाईगुड़ी जिले के राजगंज विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवारी पर अनिश्चितता बनी हुई है। उनके खिलाफ लंबित अनुशासनात्मक मामले के कारण स्थिति और जटिल हो गई है।

अदालत ने पहले स्वप्ना को अपने कदाचार को स्वीकार करते हुए रेलवे को एक पत्र देने का निर्देश दिया था। हालांकि, गुरुवार को उन्हाेंने ऐसा करने के बजाय इस्तीफा पत्र जमा कर दिया, जिससे मामला और उलझ गया। स्वप्ना बर्मन एक भारतीय हेप्टाथलॉन खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2018 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता और 2017 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हेप्टाथलॉन में प्रथम स्थान प्राप्त किया। अगस्त 2019 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

जानकारी के अनुसार, स्वप्ना ने 27 फरवरी को रेलवे की नौकरी से इस्तीफा दिए बिना ही तृणमूल कांग्रेस जॉइन कर ली थी। इसके बाद पार्टी ने उन्हें राजगंज सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया। नौ मार्च को रेलवे ने उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की, जिसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने सेवा में रहते हुए बिना अनुमति राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेकर अनुशासन का उल्लंघन किया।

स्वप्ना ने 16 मार्च को इस्तीफा सौंपा, लेकिन तब तक विभागीय जांच शुरू हो चुकी थी। इस कारण रेलवे ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके विरोध में उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच का रुख किया। इस मामले की सुनवाई बुधवार को जस्टिस गौरांग कंठ की पीठ में हुई।

सुनवाई के दौरान रेलवे ने अदालत को बताया कि स्वप्ना के खिलाफ विभागीय जांच लंबित है, इसी वजह से उन्हें चुनाव लड़ने के लिए आवश्यक क्लीयरेंस सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है। रेलवे ने यह भी कहा कि यदि स्वप्ना अपना कदाचार स्वीकार कर लें और सेवा समाप्ति के बाद मिलने वाले सभी लाभों का दावा छोड़ दें, तो उन्हें आवश्यक क्लीयरेंस दिया जा सकता है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने स्वप्ना को बुधवार शाम पांच बजे तक कदाचार स्वीकार करते हुए रेलवे को पत्र सौंपने का निर्देश दिया था। स्वप्ना ने पत्र तो जमा किया, लेकिन बताया जा रहा है कि उसकी सामग्री से रेलवे संतुष्ट नहीं हुआ।

इसके बाद रेलवे की ओर से पेश डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुदीप्तो मजूमदार ने मामले को दोबारा अदालत के समक्ष रखा। इस पर न्यायालय ने स्वप्ना को एक बार फिर स्पष्ट रूप से कदाचार स्वीकार करते हुए नया पत्र देने का निर्देश दिया।

गौरतलब है कि, स्वप्ना बर्मन रेलवे के अलीपुरद्वार डिवीजन में सोशल वेलफेयर ऑफिसर के पद पर कार्यरत थीं। मौजूदा परिस्थितियों में उनकी उम्मीदवारी पर अंतिम फैसला अब इस बात पर निर्भर करेगा कि वह अदालत और रेलवे की शर्तों का किस तरह पालन करती हैं।----------------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर