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विश्व बांग्ला लोगो को 'शांति' लोगो में बदले जाने पर विवाद, तृणमूल के ही पार्षद ने उठाए सवाल

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विश्व बांग्ला लोगो को 'शांति' लोगो में बदले जाने पर विवाद, तृणमूल के ही पार्षद ने उठाए सवाल


मालदा, 07 जुलाई (हि. स.)। जिले की पुरातन मालदा नगरपालिका में 'विश्व बांग्ला' लोगो को संशोधित कर उसे 'शांति' के प्रतीक के रूप में स्थापित किए जाने को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस के ही एक पार्षद ने अपनी ही पार्टी के नेतृत्व वाली नगरपालिका के फैसले पर सवाल उठाए हैं।

जानकारी के अनुसार, तृणमूल शासनकाल में पुरातन मालदा के मंगलबाड़ी चौरंगी मोड़ पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा हटाकर वहां 'विश्व बांग्ला' लोगो स्थापित किया गया था। उस समय नगरपालिका के प्रशासक बशिष्ठ त्रिवेदी थे। बाद में विभूतिभूषण घोष के चेयरमैन बनने के बाद नेताजी की प्रतिमा को उसके पुराने स्थान पर पुनः स्थापित किया गया और 'विश्व बांग्ला' लोगो को राजीव गांधी पुरबाजार के सामने स्थानांतरित कर दिया गया।

राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद उक्त लोगो को हटाया गया। अब उसी संरचना को फिर से स्थापित किया गया है, लेकिन उसमें मौजूद 'ब' अक्षर हटाकर उसकी जगह उड़ते हुए कबूतर का चित्र लगाया गया है और इसे 'शांति' का प्रतीक बताया गया है।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल पार्षद एवं पूर्व प्रशासक बशिष्ठ त्रिवेदी ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि इसके पीछे सरकार की कोई आधिकारिक अधिसूचना है या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि नई सरकार केवल पहले की सभी चीज़ों को बदलने में रुचि रखती है, जबकि बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।

उन्होंने अपनी ही पार्टी के चेयरमैन विभूतिभूषण घोष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विश्व बांग्ला लोगो बदलने का निर्णय उन्हीं का है। त्रिवेदी ने दावा किया कि सत्ता परिवर्तन के कुछ ही दिनों बाद नगरपालिका कार्यालय में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीर हटाकर महात्मा गांधी की तस्वीर लगा दी गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यदि भविष्य में राजनीतिक परिस्थितियां बदलती हैं तो वर्तमान चेयरमैन फिर कोई नया बदलाव कर सकते हैं। उनके अनुसार, यदि नगरपालिका का बोर्ड औपचारिक रूप से भाजपा के नियंत्रण में होता तो स्थिति अलग होती, लेकिन तृणमूल बोर्ड का भाजपा की सोच के अनुरूप कदम उठाना स्वीकार्य नहीं है।

वहीं, नगरपालिका के चेयरमैन विभूतिभूषण घोष ने मंगलवार को सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक उसके मूल स्थान पर पुनर्स्थापित किया गया। उन्होंने बताया कि 'विश्व बांग्ला' लोगो को हटाने के दौरान उसमें कुछ क्षति पहुंच गई थी। राज्य में विभिन्न स्थानों पर 'विश्व बांग्ला' लोगो के साथ तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद स्थानीय नागरिकों ने इसकी गरिमा बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का अनुरोध किया था। इसी को ध्यान में रखते हुए लोगो में परिवर्तन कर उसे शांति के प्रतीक के रूप में स्थापित किया गया।

स्थानीय निवासी विशालदीप दास ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, सिंडिकेट राज और अन्य विवादों के कारण आलोचनाओं के घेरे में रही है। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय लोगों की मांग थी कि 'विश्व बांग्ला' लोगो को हटाया जाए। उन्होंने नगरपालिका प्रशासन द्वारा लोगो में बदलाव किए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि भविष्य में वहां किसी अन्य उपयुक्त स्मारक की स्थापना की जानी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय