विकसित भारत 2047 में पश्चिम बंगाल की भूमिका पर मंथन, डीटीपीए सम्मेलन में जुटे विशेषज्ञ
कोलकाता, 6 सितंबर (हि.स.)। प्रत्यक्ष कर पेशेवर संघ (डीटीपीए) की ओर से रविवार को कोलकाता के होटल ताज बंगाल में वार्षिक सम्मेलन 2026 का आयोजन किया गया। ‘टैक्सनेक्स्ट : नवाचार, सुशासन और विकास - आज के अनुरूप ढलना, कल का नेतृत्व करना’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में कराधान, वित्तीय बाजार, सुशासन, निवेश और भारत की विकास यात्रा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, कर विशेषज्ञों, पूंजी बाजार विशेषज्ञों और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख वक्ताओं ने हिस्सा लिया। डीटीपीए की अध्यक्ष सीए मंजुलता शुक्ला ने कहा कि तेजी से बदलते कराधान, वित्तीय बाजार और आर्थिक विकास के परिदृश्य को देखते हुए सम्मेलन का उद्देश्य पेशेवरों को समकालीन दृष्टिकोण उपलब्ध कराना है।
सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथींद्र बोस ने किया। भारतीय राजस्व सेवा की अधिकारी और पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम की प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त सुरभि वर्मा गर्ग विशिष्ट अतिथि के रूप में उद्घाटन सत्र में मौजूद रहीं।
अपने संबोधन में रथींद्र बोस ने नागरिकों की सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों को समझने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। प्रत्येक व्यक्ति को यह समझने की जरूरत है कि समाज में उसकी क्या भूमिका है और उसने समाज, राज्य तथा देश के लिए क्या योगदान दिया है।
उन्होंने भारत की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत केवल एक भूखंड नहीं, बल्कि एक समृद्ध सभ्यतागत विरासत है। उन्होंने बंगाल की भाषा और संस्कृति को समझने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, बंगाल भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और विभिन्न संस्कृतियों को आत्मसात करके ही ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत किया जा सकता है।
सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण ‘विकसित भारत 2047 : भारत की विकास यात्रा में पश्चिम बंगाल की भूमिका’ विषय पर आयोजित विशेष परिचर्चा रही। इसमें नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक लाहिड़ी, पश्चिम बंगाल सरकार के वित्त मंत्री डॉ. स्वपन दास गुप्ता, भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी, विधायक एवं पूर्व प्रधान आयकर आयुक्त सुजीत कुमार तथा भारतीय राजस्व सेवा के प्रधान आयकर आयुक्त, नई दिल्ली प्रकाश दुबे ने हिस्सा लिया। परिचर्चा में पश्चिम बंगाल की आर्थिक क्षमता, निवेश की संभावनाओं और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में राज्य की भूमिका पर चर्चा हुई। सत्र का संचालन भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान के पूर्व अध्यक्ष सीए रंजीत के. अग्रवाल ने किया।
सम्मेलन समिति के अध्यक्ष सीए रमेश के. चोखानी ने बताया कि पहले तकनीकी सत्र में पूंजी बाजार के मौजूदा परिदृश्य और बदलते रुझानों पर चर्चा की गई। इसमें पूंजी बाजार विशेषज्ञ और जी बिजनेस के प्रधान संपादक सीए अनिल सिंघवी तथा निजी निवेशक एवं पूंजी बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा ने अपने विचार रखे। विशेषज्ञों ने उभरते निवेश अवसरों और बाजार की बदलती परिस्थितियों पर चर्चा की।
दूसरे तकनीकी सत्र में अधिवक्ता एवं सीए अश्वनी तनेजा, पूर्व सदस्य, आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने बेनामी कानून, धनशोधन निवारण कानून और काले धन से संबंधित कानूनी प्रावधानों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। सत्र में कराधान से जुड़े कानूनों और अन्य आर्थिक कानूनों के बीच बढ़ते संबंधों तथा उनके पेशेवरों और आम नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी चर्चा हुई।
तीसरे तकनीकी सत्र में जाने-माने कर विशेषज्ञ डॉ. (सीए) गिरिश आहूजा ने ‘आयकर अधिनियम, 2025 और आयकर अधिनियम, 1961 में महत्वपूर्ण बदलाव’ विषय पर वक्तव्य दिया। उन्होंने नए आयकर कानून में किए गए प्रमुख बदलावों और नई व्यवस्था के लागू होने से करदाताओं तथा कर पेशेवरों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को विस्तार से समझाया।
सम्मेलन में कराधान, वित्तीय बाजार, कानून, सुशासन और आर्थिक विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम ने कर एवं वित्तीय क्षेत्र के पेशेवरों को बदलती कर व्यवस्था और आर्थिक परिदृश्य को समझने के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर विचार करने का मंच प्रदान किया। सम्मेलन का समापन लकी ड्रॉ के साथ हुआ। कार्यक्रम में शैलेंद्र कुमार तिवारी की भूमिका महत्वपूर्ण थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

