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जादवपुर विश्वविद्यालय में ‘वीर सावरकर जयंती’ मनाने की पहल, अनुमति के लिए कुलपति को एबीवीपी ने लिखा पत्र

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जादवपुर विश्वविद्यालय में ‘वीर सावरकर जयंती’ मनाने की पहल, अनुमति के लिए कुलपति को एबीवीपी ने लिखा पत्र


कोलकाता, 27 मई (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जादवपुर विश्वविद्यालय में ‘वीर सावरकर जयंती’ मनाने की पहल की है। 28 मई को विनायक दामोदर सावरकर की जयंती के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांगते हुए एबीवीपी की जादवपुर इकाई ने विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र भेजा है।

कुलपति चिरंजीव भट्टाचार्य को भेजे गए पत्र में एबीवीपी ने बताया कि कार्यक्रम में पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ एक चर्चा सभा का आयोजन किया जाएगा। इसमें सावरकर के जीवन, विचारधारा और राष्ट्र व समाज के प्रति उनके योगदान पर चर्चा होगी। पत्र पर एबीवीपी जादवपुर शाखा के अध्यक्ष निखिल दास और सचिव संजीवन दीप बर्मन के हस्ताक्षर हैं।

निखिल दास ने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि सावरकर राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के प्रमुख प्रतीकों में से एक हैं। उनके अनुसार, जादवपुर विश्वविद्यालय की स्थापना भी राष्ट्रीय चेतना की भावना से हुई थी, इसलिए परिसर में सावरकर के जीवन और विचारों को सामने लाना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमि है और यहां सावरकर को सम्मान देना जरूरी है।

हालांकि, सावरकर को लेकर विवाद भी लंबे समय से जारी है। आलोचकों का आरोप है कि अंडमान की सेल्युलर जेल में बंद रहने के दौरान उन्होंने ब्रिटिश सरकार के पास कई बार दया याचिका दायर की थी।

हालांकि, एबीवीपी इन आरोपों को स्वीकार नहीं करती। निखिल दास का कहना है कि वामपंथी और कांग्रेस समर्थक समूहों ने लंबे समय तक सावरकर की छवि खराब करने की कोशिश की है और लोगों को उनके राष्ट्रवादी योगदान के बारे में जानना चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जादवपुर विश्वविद्यालय में एबीवीपी की यह पहल बंगाल की राजनीति में वैचारिक बदलाव के संकेत के तौर पर देखी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा को सामने रखकर बंगाल में हिंदुत्ववादी राजनीतिक और सांस्कृतिक आधार मजबूत करने की कोशिशें बढ़ी हैं। विश्वविद्यालय परिसर में एबीवीपी की सक्रियता को भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

एबीवीपी ने कहा है कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जाएगा। हालांकि, 28 मई को ईद के कारण विश्वविद्यालय बंद रहने की संभावना को देखते हुए कार्यक्रम की तारीख में बदलाव भी किया जा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर