नौकरी का झांसा देकर उत्तर प्रदेश ले जाई जा रही दो नाबालिग बहनें बचाई गईं, महिला तस्कर हिरासत में
कोलकाता, 19 जून (हि. स.)। पश्चिम बंगाल से मानव तस्करी की एक संभावित घटना को विफल करते हुए दो गैरसरकारी संगठनों और रेलवे सुरक्षा बल की संयुक्त कार्रवाई में दो नाबालिग बहनों को बचाया गया है। दोनों बहनों को कथित तौर पर नौकरी का लालच देकर उत्तर प्रदेश ले जाया जा रहा था। मामले में एक महिला को हिरासत में लिया गया है, जिससे पूछताछ जारी है।
गैरसरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और बितान इंस्टीट्यूट फॉर ट्रेनिंग, अवेयरनेस एंड नेटवर्किंग ने रेलवे सुरक्षा बल की सहायता से कार्रवाई करते हुए 15 और 17 वर्ष की दो बहनों को एक महिला के चंगुल से मुक्त कराया। दोनों को पूर्वांचल एक्सप्रेस से बिहार के सिवान ले जाया जा रहा था, जहां से उन्हें उत्तर प्रदेश के कुशीनगर पहुंचाने की योजना थी।
प्राथमिक जांच में पता चला है कि 15 वर्षीय किशोरी को आर्केस्ट्रा में काम दिलाने के नाम पर अधिक आय का प्रलोभन दिया गया था, जबकि उसकी बड़ी बहन को घरेलू सहायिका की नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया गया था। मामले में गिरफ्तार महिला की पहचान प्रियंका मल्लिक के रूप में हुई है। उसे हिरासत में लेकर राजकीय रेलवे पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
जानकारी के अनुसार, बड़ी बहन कक्षा 11 की छात्रा है, जबकि छोटी बहन आठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ चुकी है। उनकी मां कोलकाता में घरेलू कामगार के रूप में कार्य करती हैं, जबकि पिता संदेशखाली क्षेत्र में खेती करते हैं और वर्तमान में काम के सिलसिले में आंध्र प्रदेश गए हुए हैं।
जांच में सामने आया है कि आरोपित महिला परिवार की पड़ोसी थी। उसने परिवार की आर्थिक स्थिति का लाभ उठाते हुए बच्चियों की मां को नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और उन्हें अपने साथ भेजने के लिए तैयार कर लिया। हालांकि, उसने यह नहीं बताया था कि बच्चियों को किस प्रकार के काम के लिए ले जाया जा रहा है।
रेलवे स्टेशन पर बच्चियों के साथ संदिग्ध परिस्थितियों में महिला को देखकर सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने उससे पूछताछ की। संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर मामले की सूचना रेलवे सुरक्षा बल को दी गई। बाद में महिला ने स्वीकार किया कि वह बच्चियों को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के तरया सुजान क्षेत्र स्थित एक आर्केस्ट्रा कार्यक्रम में काम दिलाने के लिए ले जा रही थी।
बाल अधिकार संरक्षण के लिए कार्यरत नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल लंबे समय से मानव तस्करी गिरोहों के निशाने पर रहा है। उन्होंने कहा कि गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को बेहतर रोजगार और अधिक आय का सपना दिखाकर उन्हें शोषण के जाल में फंसाने की कोशिश की जाती है। ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए प्रशासन, रेलवे सुरक्षा बल और नागरिक समाज संगठनों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।
उन्होंने बच्चियों को सुरक्षित बचाए जाने और त्वरित कार्रवाई के लिए रेलवे सुरक्षा बल तथा संबंधित संगठनों की सराहना भी की। फिलहाल दोनों नाबालिगों को सुरक्षित संरक्षण में रखा गया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

