सैंड माफिया’ टुलु मंडल को हाई कोर्ट से झटका, करीब 50 करोड़ की नकदी-सोना बरामदगी मामले में एफआईआर रद्द करने से इनकार
कोलकाता, 21 अगस्त (हि.स.)। बीरभूम में करीब 50 करोड़ रुपये की नकदी और सोना बरामद होने के मामले में अवैध बालू और पत्थर कारोबारी टुलु मंडल को कलकत्ता हाई कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने मंडल की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि मंडल 23 मई को देश छोड़कर चला गया था, जो अदालत के विश्वास को मजबूत नहीं करता। मंडल के वकील ने दावा किया कि 29 जुलाई को हुई तलाशी और बरामदगी के दौरान वह मौके पर मौजूद नहीं था। इस पर अदालत ने उसके देश छोड़ने की तारीख का उल्लेख किया।
अदालत ने पुलिस को मामले की जांच कानून के मुताबिक आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि मंडल के एक रिश्तेदार के घर से अपराध से अर्जित धन होने की आशंका वाली सामग्री बरामद हुई है और फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111, यानी संगठित अपराध का प्रावधान लगाए जाने पर भी अदालत ने सवाल उठाया है। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि अन्य मामलों में मंडल के खिलाफ चार अगस्त को दो आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं। धारा 111 लागू करने के लिए पिछले 10 वर्षों में तीन साल से अधिक सजा वाले एक से अधिक अपराधों में आरोपपत्र दाखिल होने की शर्त पर भी अदालत में बहस हुई।
मंडल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने तर्क दिया कि केवल नकदी और सोना रखना अपने आप में अपराध नहीं है और ऐसे मामले में आयकर विभाग की कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। इसके जवाब में अदालत ने पूछा कि क्या सामान्य समझ वाला कोई व्यक्ति इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और सोना अलमारी में रखेगा।
29 जुलाई को पुलिस ने मंडल के बहनोई मिनार मंडल के घर पर तलाशी के दौरान सोने की छड़ें और करीब 50 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की थी। मिनार मंडल को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का आरोप है कि बरामद संपत्ति अवैध बालू खनन से हुई कमाई का हिस्सा हो सकती है।
राज्य के महाधिवक्ता सुरोजित नाथ मित्र ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और अपराध की गंभीरता को देखते हुए बीएनएस की धारा 111 लागू की जा सकती है। राज्य का दावा है कि मंडल द्वारा अवैध पत्थर खनन से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ है।
मंडल को पुलिस ने बीरभूम का ‘सैंड माफिया’ बताया है। इस मामले में मंडल की ओर से दायर एक अन्य आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर, जिसमें सिउरी अदालत द्वारा उसे घोषित अपराधी ठहराए जाने को चुनौती दी गई है, हाई कोर्ट 27 अगस्त को सुनवाई करेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

