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बंगाल स्कूल भर्ती घोटाला : ‘दागी’ उम्मीदवारों की सूची तैयार करने के निर्देश, वेतन वसूली की भी तैयारी

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बंगाल स्कूल भर्ती घोटाला : ‘दागी’ उम्मीदवारों की सूची तैयार करने के निर्देश, वेतन वसूली की भी तैयारी


कोलकाता, 13 मई (हि. स.)। पश्चिम बंगाल के स्कूल भर्ती घोटाले में राज्य शिक्षा विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को बड़ा निर्देश जारी किया है। विभाग ने जिला प्रशासन से उन “चिह्नित दागी” उम्मीदवारों की सूची तैयार करने को कहा है, जिन्होंने कथित रूप से पैसे देकर सरकारी स्कूलों में शिक्षक और गैर-शिक्षक पद हासिल किए थे।

सूत्रों के मुताबिक, जिलाधिकारियों को सिर्फ ऐसे उम्मीदवारों की पहचान करने के लिए ही नहीं कहा गया है, बल्कि उनसे यह भी कहा गया है कि वे उन लोगों को सेवा अवधि के दौरान मिले वेतन और उस पर लगने वाले ब्याज का पूरा हिसाब तैयार करें। राज्य सरकार अब इन उम्मीदवारों से वेतन की वसूली की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, “चिह्नित दागी” उम्मीदवार वे हैं जिन्होंने भर्ती परीक्षा में खाली या अधूरी उत्तर पुस्तिका जमा करने के बावजूद नौकरी हासिल की, या फिर रैंक में अनियमित बढ़ोतरी तथा पैनल से बाहर भर्ती के जरिए नियुक्ति पाई।

उल्लेखनीय है कि पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने वर्ष 2024 में और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2025 में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग की 2016 भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। अदालतों ने भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का हवाला देते हुए करीब 26 हजार शिक्षकों और गैर-शिक्षाकर्मियों की नियुक्तियां निरस्त कर दी थीं।

अदालतों ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि जिन उम्मीदवारों की नियुक्ति अवैध तरीके से हुई है, उनसे वेतन और उस पर ब्याज की राशि वापस ली जाए। हालांकि लंबे समय तक यह प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी थी। अब राज्य शिक्षा विभाग ने उच्च प्रशासनिक स्तर से निर्देश मिलने के बाद वसूली की कार्रवाई तेज करने का फैसला लिया है।

जिलाधिकारियों को भेजे गए पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन अप्रैल 2025 को स्पष्ट निर्देश दिया था कि 2016 के पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग पैनल में पैसे देकर नौकरी पाने वाले अयोग्य शिक्षकों को वेतन लौटाना होगा।

सूत्रों के अनुसार, पहले इस मामले में लापरवाही बरती गई थी, लेकिन अब राज्य सरकार सर्वोच्च अदालत के आदेश को लागू करने के लिए तेजी से कदम उठा रही है।

कुछ वर्ष पहले जब अयोग्य उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक हुई थी, तब उसमें तृणमूल कांग्रेस नेताओं के कई रिश्तेदारों और करीबी लोगों के नाम होने का भी दावा किया गया था। भर्ती घोटाले के कारण कुल 25 हजार 735 लोगों की नौकरियां गई थीं। इनमें 18 हजार 418 शिक्षक थे, जबकि बाकी गैर-शिक्षाकर्मी शामिल थे।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर