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जादवपुर विश्वविद्यालय की जांच समिति के गठन पर संघ से जुड़े शिक्षकों के संगठन ने जताई आपत्ति

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कोलकाता, 22 अगस्त (हि. स.)। जादवपुर विश्वविद्यालय में 19 और 20 अगस्त को मुख्य परिसर में हुई घटनाओं की जांच के लिए गठित समिति की संरचना पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की पश्चिम बंगाल उच्च शिक्षा इकाई ने गंभीर आपत्ति जताई है। संगठन ने विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र भेजकर मौजूदा जांच समिति को तत्काल वापस लेने और नए सिरे से स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है।

संगठन ने जांच समिति के अध्यक्ष के रूप में प्रोफेसर शुभ शंकर सरकार की नियुक्ति पर विशेष सवाल उठाए हैं। पत्र में दावा किया गया है कि 2022 में पश्चिम बंगाल केंद्रीय विद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष पद से उन्हें हटाया गया था।

संगठन ने कहा है कि उस समय शिक्षकों की भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में कार्यवाही हुई थी और अदालत ने उन पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इन दावों के समर्थन में संबंधित समाचार रिपोर्टों की प्रतियां पत्र के साथ संलग्न की गई हैं।

संगठन का कहना है कि जांच समिति का गठन इस तरह होना चाहिए कि विश्वविद्यालय के सभी पक्षों को उसकी निष्पक्षता पर भरोसा हो।

पत्र में विश्वविद्यालय के उप रजिस्ट्रार डॉ. अबुल हसनाथ की नियुक्ति का मुद्दा भी उठाया गया है। संगठन ने दावा किया है कि उसने 15 मई 2026 को कुलपति को पत्र लिखकर उनकी नियुक्ति की वैधता और प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।

संगठन के अनुसार, नियुक्ति से जुड़ी कार्यकारी परिषद के प्रस्ताव में कथित हेरफेर और उनकी निर्धारित न्यूनतम योग्यता को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। संगठन का कहना है कि इन आरोपों की अब तक जांच नहीं कराई गई है।

संगठन ने यह भी आपत्ति जताई है कि डॉ. हसनाथ को मौजूदा जांच में प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। उसके मुताबिक, जिन लोगों की नियुक्ति या भूमिका पहले ही गंभीर कानूनी अथवा संस्थागत सवालों के घेरे में रही है, उन्हें जांच प्रक्रिया में शामिल किए जाने से समिति की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने कुलपति से मौजूदा जांच समिति की संरचना पर तत्काल पुनर्विचार करने, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और अनुभवी जांच अधिकारियों को शामिल करते हुए नई स्वतंत्र समिति गठित करने तथा संभावित हितों के टकराव वाले किसी भी व्यक्ति को जांच से दूर रखने की मांग की है। साथ ही डॉ. अबुल हसनाथ की नियुक्ति से जुड़े पहले उठाए गए सवालों की जांच कराने का भी अनुरोध किया गया है।

पत्र की प्रति जादवपुर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और पश्चिम बंगाल सरकार के उच्च शिक्षा विभाग को भी भेजी गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / गंगा