home page

पूजा से पहले चाय बागानों में बोनस को लेकर बढ़ा तनाव, 11 सितंबर को होगी पहली बैठक

 | 
पूजा से पहले चाय बागानों में बोनस को लेकर बढ़ा तनाव, 11 सितंबर को होगी पहली बैठक


जलपाईगुड़ी, 02 अगस्त (हि. स.)। दुर्गापूजा से पहले उत्तर बंगाल के चाय बागानों में बोनस को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ने लगा है। चाय बागान मालिकों के संयुक्त मंच कंसल्टेटिव कमेटी ऑफ प्लांटर्स एसोसिएशन (सीसीपीए) के आह्वान पर आगामी 11 सितंबर को द्विपक्षीय बैठक होगी। इस दिन सभी मान्यता प्राप्त श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ मालिक पक्ष ऑनलाइन बैठक करेगा।

बैठक के ऐलान के साथ ही डुआर्स और तराई के चाय बागानों में बोनस को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है।

श्रमिक संगठन इस बार भी बातचीत के जरिए एकमुश्त 20 प्रतिशत बोनस हासिल करने की मांग पर अड़े हुए हैं। पिछले वर्ष द्विपक्षीय बातचीत की प्रक्रिया के बजाय राज्य सरकार की ओर से 20 प्रतिशत बोनस को लेकर एकतरफा एडवाइजरी जारी किए जाने के बाद पहाड़ और डुआर्स के कई चाय बागानों में विवाद की स्थिति पैदा हो गई थी।

सूत्रों के अनुसार,

चामुर्ची चाय बागान पूजा से ठीक पहले बंद हुआ था और अभी तक बंद है। वहीं सुरेंद्रनगर और रेडबैंक जैसे बागान भी मालिकों द्वारा छोड़ दिए जाने के कारण संकट में हैं। कई चाय बागानों ने पिछले वर्ष का बोनस अब तक पूरी तरह नहीं चुकाया है, जबकि कुछ जगहों पर भुगतान अभी भी किस्तों में किया जा रहा है। ऐसे में श्रमिक संगठन इस बार शुरुआत से ही सख्त रुख अपनाते नजर आ रहे हैं।

भाजपा समर्थित भारतीय टी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष युगलकिशोर झा ने बुधवार को बताया कि किसी भी कीमत पर 20 प्रतिशत बोनस देना होगा। इस मांग को लेकर सात और आठ सितंबर को डुआर्स और तराई के विभिन्न चाय बागानों में गेट मीटिंग आयोजित की जाएगी।

तृणमूल चाय बागान श्रमिक यूनियन के केंद्रीय महासचिव रबीन राय ने भी 20 प्रतिशत बोनस की मांग को जायज बताते हुए कहा कि चाय श्रमिकों की दैनिक मजदूरी महज 250 रुपये है और उन्हें अन्य सुविधाएं भी पर्याप्त रूप से नहीं मिलती। ऐसे में बोनस ही उनके लिए बड़ी आर्थिक राहत है और 20 प्रतिशत से कम बोनस स्वीकार करना मुश्किल होगा।

वहीं, संयुक्त मंच ज्वाइंट फोरम के संयोजक और सीटू नेता जियाउल आलम ने ऑनलाइन बैठक पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वर्चुअल बैठक में कई बार गैरजरूरी मुद्दे सामने आ जाते हैं। इसलिए 11 सितंबर की प्रारंभिक बातचीत के बाद 15 सितंबर तक आमने-सामने की बैठक की तारीख तय करने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि ढाई साल से मजदूरी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है और 20 प्रतिशत बोनस श्रमिकों का जायज अधिकार है।

दूसरी ओर, सीसीपीए के महासचिव अरिजीत राहा ने कहा कि चाय बागानों में बोनस का फैसला हमेशा बातचीत के जरिए होता आया है और इसी परंपरा के तहत बैठक बुलाई गई है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच चर्चा के जरिए ही बोनस का समाधान निकलेगा।

दुर्गापूजा से पहले बोनस को लेकर शुरू हुई यह रस्साकशी अब 11 सितंबर की बैठक पर टिक गई है। 20 प्रतिशत बोनस की मांग पर श्रमिक संगठनों के सख्त रुख और मालिक पक्ष की बातचीत की रणनीति के बीच इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार