तारातला गोदाम हादसा : केएमसी का उप-सहायक अभियंता गिरफ्तार, आरोपितों की संख्या हुई सात
कोलकाता, 12 सितंबर (हि.स.)। दक्षिण कोलकाता के तारातला में जून में निर्माणाधीन तीन मंजिला गोदाम ढहने के मामले में कोलकाता पुलिस ने कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के एक उप-सहायक अभियंता को गिरफ्तार किया है। सात जून को हुए इस हादसे में 16 लोगों की मौत हुई थी। पुलिस के अनुसार, अभियंता की गिरफ्तारी के बाद मामले में गिरफ्तार आरोपितों की संख्या बढ़कर सात हो गई है।
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, गिरफ्तार अभियंता की पहचान 28 वर्षीय अमीनुर शेख के रूप में हुई है। उसे शनिवार सुबह दक्षिण कोलकाता के बांसद्रोणी स्थित उसके आवास से गिरफ्तार किया गया। शेख केएमसी के वार्ड 80 में निर्माण कार्य से संबंधित जिम्मेदारी संभाल रहा था। जांच अधिकारी अब निर्माण की मंजूरी और उससे जुड़े दस्तावेजों में उसकी भूमिका की पड़ताल कर रहे हैं। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि मंजूरी प्रक्रिया में उसके अलावा और कौन-कौन लोग शामिल थे।
निर्माणाधीन गोदाम सात जून की दोपहर ढह गया था। हादसे के बाद पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें निर्माण एजेंसी आयान ट्रेडर्स का सुपरवाइजर गुलजार हुसैन, गोदाम के लोहे के ढांचे का निर्माण कराने वाला कमल सामंत, जमीन लीज पर लेने वाला शंभुनाथ बेहरा, श्रमिकों की आपूर्ति करने वाला दिबाकर भंडारी और केएमसी की डिजाइन मंजूरी प्रक्रिया में कथित रूप से शामिल अब्दुल हमीद शामिल थे।
इसके बाद पूर्व केएमसी मेयर फिरहाद हकीम के तत्कालीन विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) कालीचरण बनर्जी को भी गिरफ्तार किया गया था। अब अमीनुर शेख की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या सात हो गई है।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि निर्माणाधीन गोदाम को कथित तौर पर उचित निरीक्षण के बिना केएमसी से मंजूरी मिल गई थी। जांचकर्ताओं ने भवन के संरचनात्मक डिजाइन में भी खामियां पाई हैं। इसके अलावा निर्माण शुरू होने से पहले मिट्टी की पर्याप्त जांच की गई थी या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
जांच का एक प्रमुख बिंदु यह है कि मिट्टी की भार वहन क्षमता और भवन की संरचनात्मक क्षमता का पर्याप्त आकलन किए बिना निर्माण को मंजूरी कैसे दी गई। हादसे के तकनीकी और प्रक्रियागत कारणों की जांच में जादवपुर विश्वविद्यालय के संरचनात्मक विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है।
हादसे के बाद केएमसी की निर्माण मंजूरी और निरीक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे। अब पुलिस की जांच का केंद्र निगम अधिकारियों, ठेकेदारों और परियोजना से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका पर है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर हादसे की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

